Monday, 2 December 2013

मेरी कविता और गज़ल भी तुम

सिने से लगा लूं मै तुमको,
और बाहों मे लेके प्यार करूं !
तुम्हे दिल मे छिपा के मै रखूं,
और राहों मे तेरा ईंतज़ार करुं !!

खुशियों के आंसू छलका के,
तेरी खुशबू मे मै तो समा जाऊं !
तुझे आंखो मे अपने बसा करके,
और गीत मिलन के मै गाऊं !!

तेरी जादुई जैसी ज़ुल्फ़ों को,
चेहर पे अपने घुमाता जाऊं !
मस्त बहारों के मौशम मे,
तुम्हे प्यार से मै सहलाता जाऊं !!

जिंदगी मेरी हो, और जीवन भी,
मेरी श्वांश और धड़कन भी तुम !
नील गगन कि परी हो तुम,
मेरी आश और तन-मन भी तुम !!

मेरी नींद तुम्ही,सुख-चैन भी तुम,
तुम मधुर राग शहनाई हो !
मेरी कविता और गज़ल भी तुम,
तुम मेरे जीवन मे रोशनी लायी हो !!

सिने से लगा लूं मै तुमको,
और बाहों मे लेके प्यार करूं !
तुम्हे दिल मे छिपा के मै रखूं,
और राहों मे तेरा ईंतज़ार करुं !!



मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१८/१०/२००० ,वुद्धवार , शाम-.३५ बजे,
चंद्रपुर(महाराष्ट्र)


Tuesday, 26 November 2013

कल दिन के उजाले आएंगे

जिंदगी की राह कठिन है,
इससे घबराना ठीक नही !
आगे आती मुश्किलों से,
 ध्यान हटाना ठीक नही !!

आती है मुश्किलें आने दो,
हंस करके इसे दिल मे भर लो !
कितना भी दुख यदि आए तो,
मन के मंदिर मे इन्हे धर लो !!

जहां दुख है तो वहां सुख भी है,
बस थोड़ा सा ईंतज़ार करो !
आंसू यदि दुख के निकल रहे,
तो कल खुशियों के आंसू से मांग भरो !!

या हो अमीर या हो गरीब,
दुख-सुख तो सभी को आते हैं !
कोई रो-रो के सह लेते है,
कोई हसते हुए पी जाते हैं !!

कांटे है जहां, वहां फ़ूल भी हैं,
कांटे ये तुम्हे तो डराएंगे !
है अंधेरी , काली रात अभी,
कल दिन के उजाले आएंगे !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक- ०४/०३/२००१, रविवार,शाम -.०५ बजे,
केरला एक्स्प्रेस, बल्लारशाह जं और सेलम के मध्य ,
चित्र ;गूगल से सादर लिया गया ।