Friday, 25 November 2011

भजन(ऐ री सखी जिसे देखा है आज)

ऐ री सखी जिसे देखा है आज,मेरा दिल ले गया, मेरा दिल ले गया !
तन पे पिताम्बर ,गले मे हार,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी....

जब से देखा है उसको हमने,मन नही लगता है कोई काम को करने !
नही है मुझे अपना होशो-हवास,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

अपनी बसुरिया कैसे बजाता,हमको सखी वो खूब रिझाता !
कहते थे सब उसको राधा का श्याम,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

वॄंदावन मे वो रास रचाता,ग्वालों के बीच मे वो धेनु चराता !
वो तो सखी है पूरण काम, मेरा दिल ले गया मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

उसकी ऐसी मोहिनी मूरति,कभी न देखी ऐसी सावली सुरति !
कहते थे सब उसको माखन चोर,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

मै सखी अब दिन रात तड़पती,उसके दरश को अखियां तरसती !
जल बिन मछली जैसा मेरा हाल,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

मै तो उसकी प्रेम दिवानी,मेरे आखो से बहते नित पानी !
मै तो जाउंगी उसके ही पास,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

भुख प्यास नही लगती मुझको,कैसे भी पा जाती मै उसको !
कहा खो गया है मेरा श्याम, मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

उसका श्याम सलोना चेहरा,माथे पे मोर-पंख का सेहरा !
वो मुझे याद आए दिन रात,मेरा दिल ले गया,मेरा दिल ले गया !!
ऐ री सखी...

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१४/७/१९९१,
रविवार,शाम-५.१२ बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी,गाजियाबाद (उ.प्र.)

Wednesday, 23 November 2011

गजल(उदास दिल है तेरा)


तुम्हारी उदासी का राज क्या हो सकता है
तुम निराश हो इस समय मुझे ऐसा लगता!
ये वक्त है किमती इसे यु ना गवावो
आलस को छोड़कर अब होश मे तो आवो!!


उदास दिल है तेरा और उदास ही चेहरा!
अब भी अपने को अभालो यही है फ़र्ज तेरा!!
उदास.....
तुम अपने से गुलामी मे बध रहे हो क्यु!
तुम्हे नही है अकल कि क्या मै कैसे रहू!!
उदास...
सोचने से तो ये वक्त गुजर जाता है!
गया हुआ ये समय फ़िर नही आता है!!
उदास,,,
इसलिए तुम अभी से इंषान बन जावो!
तुम्हारे को कोई रोके तो तुफ़ान बन जावो!!
उदास...
किसी से हम नही है कम ये बात दिल मे रखो!
हम होगे कामयाब ये बात दिल मे रखो!!
उदास..
आलसी हम नही बनेगे ये मेरा वादा!
करेगे काम अभी से ये मेरा वादा!!
उदस..
ऐसे अनमोल समय को बिता दिया सोकर!
अब फ़ौलाद बनो तुम नही जीवो रोकर!!
उदास..
तेरी बाहो मे इतनी ताकत है अभी!
कर सकते ये हाथ तेरे सब काम सभी!!
उदास...
जिन्दगी मे आलस है मिठा सा जहर !
इसलिए तुम इसे छोड़ो,बनो उचा सा लहर!!
उदास..
तुमसे है मेरी छोटी सी अरज यारो!.
ठान लो नही किसी से कम हम यारो!!
उदास दिल है तेरा....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-१३/७/१९९१ ,शनिवार,शाम-५.२५ बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (उ.प्र.)

) मे्रे सजन तुम रुठो ना, मै तेरे पास रहुंगी!


मेरे सजन तुम रुठो ना, मै तेरे पास रहुंगी!

चाहे जो तुम मुझ पर करोगे,मै सब कुछ सहुंगी!!
तेरे लिए मैने सब कुछ छोड़ा ,कोई सहारा न मेरा!
आज मै कितनी खुश्किश्मत हु जो पाया साथ मै तेरा!!
तेरे बिना मै नही रह सकती,बिन तेरे मर जाउंगी!
अओ मेरे बालम जावोगे तुम जहा,वही मै भी जाउंगी!!
अओ मेरे सजना मै ना भुलू तेरी इक बात !
य्यद आती है वो प्रीतम जिवन की वो पहली रात!!
उस तुम मुझे बाहो मे लेकर, के-इए थे कितने वादे!
आज जैसे रह गया सब कुछ बिती हुई इक यादे!!
मेरे पिया तुम जब से गए हो ,इक भी खत न दिया!
तेरे खत के सहारे मै कुछ दिन, जी लेती मै पिया!!
मिठी-मिठी तेरी बाते शर्मिले कितने हो तुम!
तेरी अदा का जवाब नही है,कितने रसीले हो तुम!!
जीवन मे पहली बर मिले जब ,दोनो के मुह सिले थे!
लेकिन दुसरी बार मिले जब दोनो ही हम खिले थे!!
सावन-भादो-क्वार-कार्तिक-पूष या फ़ागुन का महिना!
बिन तेरे पिया मै रह नही सकती,तेरे बगैर नही जीना!!
मै चन्दा तुम हो सुरज, मै धरती तुम आकाश!
जैसे जल बिन मछली का है,वैसे पिया मेरा हाल!!
आखिर मे मेरी यही दुआ है,जहा भी तुम रहना!
मेरे बलम खुश होके रहना ,कोई तुम्हे कुछ कहे ना!!
मेरे सजन तुम रुठो ना,मै तेरे पास रहुंगी!
चाहे जो तुम मुझ पर करोगे,मै सब कुछ को सहुंगी.....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-११/७/१९९१,बॄहस्पतिवार,शाम -६.३५ बजे,
एन.टी.पी.सी.,दादरी .गाजियाबाद (उ.प्र.)

Monday, 21 November 2011

इतने दिन से तमन्ना कितनी थी मेरी


इस आज हम सब इकट्ठा हुए इस जगह
खुशी का कोई ठिकाना नही!
मै भी इनकी खुशी मे मदमस्त हू
चाहे सबको मेरा नागवारा सही!!

इतने दिन से तमन्ना कितनी थी मेरी,
मै भी पाने की कोशिश करता रहा!
पर मेरे भाग्य मे ऐसा कहा था बदा
जिन्दगी भर उसी पर मै मरता रहा!!
आज तक मैने सोचा जो वो पाया नही
यह मेरी बदनसीबी का बुरा खेल है!
मै चुन-चुन के झोपड़ को बनाता रहू
पहले झोपड़ तो बाद मे जेल है!!
आज मेरा मुकाद्दर मुझसे रूठा हुआ
कल जो हे मेरे आज बेगाने हुए!
मै इतने दिनो से उन्हे पहचाना नही
मै दिए उन्हे फ़ूल वो मुझे काटे दिए!!
मेरा किसी से कोई शिकायत नही
जानता था मै इक दिन ऐसा ही होगा!
मै किसी को कैसे दोष दू साथियो
मेरे आलस का शायद ये फ़ल मिला होगा!!
मैने अब तक किया सबका अच्छा मगर
मुझको अच्छाई के बदले बुराई मिला!
फ़िर भी मेरा ये दिल मानता है नही
किस तरह मै कहू बात का सिलसिला!!
इतने दिन से तमन्ना ...

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२९/६/१९९१ ,शनिवार,रात्रि १०.२० बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी गाजियाबाद (उ.प्र.)

गजल(मेरे दिल मे कितनी चुभन सी है)


मैने कौन सा ऐसा भुल किया,जिसकी सजा मुझे मिलने लगी!
मेरे दिल मे कैसा घाव लगा,वो जख्म कभी पुरी न होगी!!

मेरे दिल मे कितनी चुभन सी है मै बया किस कदर से करू यारो!
मेरे आखो से आसू निकलते नही,मै डरा-डरा सा रहू यारो!!
मेरे दिल मे....
दिन रात मै सोचा करता हु,ये पाप कौन सा मैने किया!
किस बात का सबने बदला लिया,मुझे मौत के बदले घुटन दे दिया!!
मेरे दिल मे...
मै दिल को समझाने कि कोशिश करू,पर सफ़लता नही मिलता है मुझे!
मेरे अरमान अब सब खतम हो गए,अब चिड़ियो ने दानो को चुग लिया!!
मेरे दिल मे...
भुख लगती नही,प्यास मिटती नही और रातो का सोना हराम हो गया!
अच्छे जीवन का कोई ठिकाना नही,अब तो मरना और भी आसान हो गया!!
मेरे दिल मे...
मै चाहा जिसे उसका दुश्मन बना,हमको मिठा जहर सब पिलाते रहे!
मै समझ ना सका उनकी चाल को,अपनी बातो से वो सब लुभाते रहे!!
मेरे दिल मे...
अपनी तकदीर ने मुझको धोखा दिया,आज अपने से बेबस पड़ा हु यहा!
मै किसी से कुछ कह ना सकू,मै भटकता रहू, यहा से वहा!!
मेरे दिल मे...
अपना ईरादा तो यही एक है,किसी को अपने से न कोई तकलीफ़ हो!
किया हो बुरा तुम चाहे जैसे मेरा,तुम जहा भी रहो सुख से रहो!!
मेरे दिल मे...
मेरा जी चाहता है जाकर रूओं कही,पर रोने से भी अब क्या फ़ायदा!
मिलेगा मुझको अपने कर्मो का फ़ल,जो मेरी तकदीर मे होगा वदा!!
मेरे दिल मे कितनी चुभन सी है....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-१०/७/१९९१ ,वुद्धवार,रात्रि ९.१५ बजे,
एन.टी.पी.सी. दादरी ,गजियाबाद (उ.प्र.)

भजन(भगवान जी का)



मेरी नइया पड़ी मझधार मे, प्रभु आके मुझे उबारो!
इक संकट खड़ा हैसामने,प्रभु आके मुझे उबारो!!
मेरी नइया....
ये मेरी कश्ती डूब रही है आके दे दो सहारा!
हे मन मोहन श्याम सलोने आके दे दो किनारा!!
तीन जने मिल डुबा रहे है ,मै हू अकेला आज!
इन तिनो को दूर भगाकर, कर दो मेरे काज!!
सुंदर श्याम सलोना गिरिधर मोहन मदन मुरारी!
तेरे नाम अनेको है प्रभु सगुन-अगुन-निरंकारी!!
तेरा सहारा केवल भगवन कोई नही है मेरा!
आके मेरी लाज बचालो कहा किए हो बसेरा!
ये जग सारा झुठा भगवन,जैसे कोई मेला!
चार दिनो की जींदगानी मे सब करते है खेला!!
जब संकट मे पड़ते है प्रभु तब-तब तुम्हे पुकारे!
तुम ओ कितने दीन-दयालु सब के संकट काटे!!
जो जिस भाव से लेते है प्रभु तेरा कोई नाम!
उसी रुप मे सबके प्रभु आके करते काम!!
मेरे को सब ताने कसते,हसते है मुझ पर!
मेरा अपना कोई नही है एक सहारा तुझ पर!!
अब मै हार गया हु सबसे कोई नही है आश!
मुझको पुरी आशा है प्रभु तुम आवोगे मेरे पास!!
मेरी नइया पड़ी मझधार मे प्रभु आके हमे उबारो!
इक संकट खड़ा है सामने प्रभु आके हमे उबारो....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-६/७/१९९१ ,शनिवार,रात्रि १०.१५ बजे,
एन.टी.पी.सी. ,दादरी ,गाजियाबाद (उ.प्र.)




मैने तुमसे प्यार किया है ये कोई धोखा नही!


मैने तुमसे प्यार किया है ये कोई धोखा नही!
मेरी जिन्दगी मे बस तुम ही तुम हो बस रोने का मौका नही!!
मेरी लाडली तुम रोती क्यु हो ,हरदम हसती रहो!
तुम अपना दिल छोटा न करना पल-पल खिलती रहो!!
हमने तुमको पाने के लिए क्या-क्या-जुगत न किया!
मैने तेरी चाहत के बदले सब कुछ लुटा दिया!!
ये मेरा तुमसे वादा है मैडम,मै सिर्फ़ तुम्हारा रहुंगा!
तेरे लिए मेरी नूरजहा सब कुछ सहा करुंगा!!
ये मेरी ख्वाहिश है जीन्दगी मे ,तु ना कभी हो उदास!
मेरी जा मेरे मरने के पहले ,तुम ना छोड़ो स्वाश!!
तु ना कभी मुझे छोड़ के जाना,हरदम मेरे साथ रहो!
जैसे मै चाहू मेरी जा तुम सब करती रहो!!
आज मेरा दिल कितना खुश है तुझको पता नही!
सारा जमाना है आज अपना,सब कुछ मानो सही!!
पर तेरे आसु को देखकर मै कितना दुखी हो रहा!
मै तेरी खुशी पर जान लुटा दू ला दू मै सारा जहा!!
वो मेरी शबनम-वो मेरी मोती कैसे भी तुम हस दो!
अब ना रुलावो मुझको भी जानम, तुम आस पुरी कर दो!!
मेरे कितने सपने है यारा,वो पुरी क्या ना करोगी!
तेरे जाने से ऐ मेरी बेगम,ये जिन्दगी अब ना होगी!!
सब कुछ मैने बता दिया हैतुमसे,कुछ भी छिपाया नही!
अच्छा-बुरा तुम खुद सोच लो,जो कुछ मानो सही!!
मैने तुमसे प्यार किया है,ये कोई धोखा नही!
मेरी जीन्दगी मे बस तुम ही तुम हो,रोने का मौका नही....

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-५/७/१९९१ ,शुक्रवार,शाम ६.४५ बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (उ.प्र.)