Sunday, 27 November 2011

अम्बे स्तुति(देखो मइया कि मूरति को)

उंचे पर्वत वाली मइया, कब से रहा पुकार !
एक दुखी की आह को, सुन लो, आया तेरे द्वार !!

देखो मइया की मूरति को, हरदम हसती रहती !
चाहे इसको कितना कष्ट हो, सबको सहती रहती !!
देखो मइया की ....

सिर पे चन्द्रमा सोहे मां के, और  गले मे हार !
माथ पे मां के मुकुट भी सोहे,और गले मे मुण्डमाल !!
कमर करधनी नरमुण्डों की ,हाथ मे खप्पर धारी
देखो मइया की...

कितनी अपनी दयालू माता, सब पर कॄपा बरसाये !
हे मा ऐसी चर्चा सुनकर, हम तेरे द्वारे आये !!
हमने ऐसा सुना है माता,सब कुछ तुम कर सकती
देखो मइया की...

पार ब्रह्म परमेश्वरि तुम हो,मां तुम शेरा वाली !
राम- कृष्ण -कैलाष पति तुम, तुम हो दुर्गा काली !!
तुम हो मां सुरज- चन्दा- नील गगन व धरती
देखो मइया की मूरति को....

तेरी वन्दना कर नहि सकता,मै मूरख अग्यानी !
सबकी कामना पुरी कर दो,तुम हो कितनी दानी !!
छिपा नही तुमसे कुछ भी,तुम सब देखा करती
देखो मइया की...

एक सहारा तेरा है मां, कोई नही है मेरा !
जो कुछ है मां मेरे पास मे,वो सब कुछ तेरा !!
करो कृपा माता तुम हम पर,दे दो अपनी भक्ती
देखो मइया की..

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१९/७/१९९१ ,शुक्रवार ,सुबह,१०.२० बजे,
एन.टी.पी.सी.दादरी, गाजियाबाद(उ.प्र.)


Friday, 25 November 2011

हस-हस के तुम जिवो सब यार

हस-हस के तुम जिवो मेरे यार,रो-रो के जीना नही !
खुश हो करके काम करो सब ,डर-डर के रहना नही !!

अपने से जैसा हो सके यारों,सबका करो उपकार !
चाहे कोई जैसे भी हो सब ,उनसे करो तुम प्यार !!

अपनी मेहनत और लगन से ,अपने करो तुम काम !
चाहे कितनी बाधा आए,आधी या तुफ़ान !!

सपने सजाए होंगे तुम अपने,उन्हे तुम पुरा करो !
आलस और अभिमान को अपने,मन से दूर करो !!

जीवन है थोड़ा, काम है जादा,वक्त गुजरता जाए !
तुम पर टिकी है निगाहें सभी की,और बड़ी आशाएं !!

हस -हस के तुम जीवो मेरे यार, रो-रो के जीना नही !
खुश हो के काम करो सब,डर-डर के रहना नही !!...

मोहन श्रीवास्तव (कवि)





दिनांक-१७/७/१९९१ ,वुद्धवार , सुबह ८.५५ बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी .गाजियाबाद (उ.प्र.)

गजल(प्यार ये ऐसी चीज है)


प्यार ए ऐसी चीज है ,जिसका नही है मोल !
ये ऐसा तराजू है यारों, जिसका नही है तोल !!

इस रोग का न कोई ठिकाना,कब किसको लग जाय !
इसकी कोई दवा नही है,कब किससे छिन जाय !!

कोई कितना अपने दिल को संभाले, फ़िर भी करता ये वार !
अमिर-गरीब-उंचा-निचा,देखे नही ये प्यार !!

हीर-रांझा-लैला-मजनू,दिवाने सिरी-फ़रहाद !
इसके किस्से अनेकों है ऐसे,जिसे करते सब याद !!

इसके खेल अनेकों है यारों,दो दिल कब बिछुड़ जाय !
ये ऐसा नाजुक चीज भी है, जो छुने से टूट जाय !!

मैने भी इक से प्यार किया था,जो ना मुझे वो मिला !
वो प्यार का फ़ूल ऐसा था मेरा,जो ना कभी भी खिला !!

आखिर मे मेरा यही दुआ है,जो भी करे कोई प्यार !
सबको सब की अमानत मिले, और सब को सब का प्यार !!

प्यार ये ऐसा चीज है,जिसका नही है मोल !
प्यार इक ऐसा तराजू है यारों,जिसका नही है तोल !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१५/७/१९९१ ,सोमवार,सुबह , ७.३५ बजे,

एन.टी.पी.सी.दादरी ,गाजियाबाद (उ.प्र.)