Saturday, 10 March 2012

गर्मी का कहर

गर्मी की व्याकुलता से,
लोगों का हाल बेहाल हुआ !
तपती धूप मे लोगों का,
चेहरा सुर्ख सा लाल हुआ !!

होंठ सुख गये लोगों के,
चेहरे मुर्झाए हैं लगते !
इस महाताप की पिड़ा से,
अपने भी कुम्हलाए लगते !!

.सी. कूलर की हवा मे हैं जब तक,
तब तक दूर है गरमी उनसे !
बाहर निकलते ही उनके,
गर्मी प्यार करने को आतुर उनसे !!

सुर्योदय से सुर्यास्त तक,
लोग बिकल हो जाते हैं !
इस बेशर्मी गर्मी से लोग,
अपने कपड़ों से मुह को छिपाते है !!

पानी-छांव ठंडी हवाएं,
जो इनका ही सहारा है !
जिनको ये तीनों नही सुलभ,
वो तो गर्मी का मारा है !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

२५//१९९९,रविवार,दोपहर,.२० बजे,चन्द्रपुर महा.

अनमोल रत्न

हिन्दुस्तान के बेटे- बेटियों ,
अब अपनी चिर-निद्रा दूर करो !
आलस -प्रमाद को दूर भगाकर,
अब अपनी तन्द्रा दूर करो !!

भारत माता के अनमोल रत्न,
तुम अब अपने को पहचानो !
बापू-सुभाष-बाबा साहेब तुम,
वैसे ही तुम हो जानो !!

तेजी से बदल रही दुनिया के,
साथ हमे भी चलना है !
कहीं हम पिछे न रह जाएं,
यह बात दिल मे हमे रखना है !!

जाति-पाति व ऊंच-नीच का,
मिथ्या भेद बदल डालो !
सामाजिक बुराइयों को,
 तुम जड़ से, इसे पलट डालो !!

आपसी भेद भुलाकर ही,
कई नेक काम हमे करने है !
गरीबी-बेकारी व शिक्षा के क्षेत्र मे,
नित नए खोज हमे करने है !!

निजी स्वार्थ को भुलाकर के हम,
भारत के हित की सोच करें !
दुनिया मे नाम हो जैसे इसका,
 हम इसके बिषय मे शोध करें !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
२५//१९९९,सुबह-:३०बजे,
चन्द्रपुर,महा.



मानव धर्म

तुम चार दिन के जीवन मे ,
नेकी के काम कर लो !
इस बिष भरे बदन को,
अमृत के रस से भर लो !!

मुश्किल से ये मिली है,
अनमोल तेरी काया !
अब तक हिसाब कर लो,
क्या खोया क्या है पाया !!

दुष्कर्म यदि किया है,
तो तुमने बहुत है खोया !
सत्कर्म यदि किया है,
तो तुमने बहुत है पाया !!

वाणी मिली जो तुमको,
तो मिठे स्वर से बोलो !
आखों मे तुम तो अपनी ,
दृष्टि दया की कर लो !!

कानों से तुम तो अपने,
अच्छी सी बातें सुन लो !
हाथों से तुम तो अपने,
श्रद्धा से दान कर लो !!

पावों को तुम तो अपने ,
सन्मार्ग पर बढ़ावो !
मन को तुम तो अपने,
 प्रभु ध्यान मे लगावो !!

मोहन की प्रार्थना है,
कुछ नाम कर के जावो !
दुनिया से जावो तुम तो,
सत्काम कर के जावो !!
तुम चार दिन के जीवन मे.........


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

२३//१९९९,शुक्रवार,.१० बजे,चन्द्रपुर महा.