Saturday, 20 July 2013

पर इनको देश लूटने पर


हालात देश का, देख-देख कर,
आंखों मे आंसू, जाता !
दर्द दिलों में, होता है,
और उजाले पर, अंधेरा छा जाता !!

कुर्सी पाने की, होड़ मे देखो,
नित जूतम-लातम होते हैं !
जातियता का, ज़हर घोलकर,
बहुत चैन की, नींद में सोते हैं !!

देश पर ध्यान, है कम इनका,
सदा वोटों के, गणित में उलझे रहते !
अपराध , घोटाले करते जाते,
और निर्दोष होकर, छूटते रहते !!

एक आम आदमी के, गलती करने पर,
उसे हर तरह की, सजांए दी जाती !
पर इनको देश, लूटने पर ,आदर से,
विरोधी दलों मे, पनाह है मिल जाती !!

राजनीति के, ऐसे कुछ नेता,
जो देश का, खून पी रहे हैं !
लोगों मे, दहशत फ़ैलाकर,
वे खूब मजे से, जी रहे हैं !!

 मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
 दिनांक-०९/०२/२००० , वुद्धवार, शाम बजे


Thursday, 18 July 2013

मिड डे मील का भी यही हाल


सरकारी योजनायें, होते हैं अच्छे,
जिससे लोगों को लाभ, पहुंचाए जाते
इन्हीं योजनावों मे, एक मिड डे मील,
जहां स्कूली बच्चों को, आहार खिलाए जाते

आमतौर पर, सरकारी योजनावों मे,
भ्रष्टाचार का साया, तो रहता ही है
बहुतों की कमाई, होती है इनसे,
पर बहुतों को, लाभ मिलता भी है

मध्याह्न भोजन, का भी यही हाल,
जहां आहार की, गुणवत्ता ठीक नही
अफसर शाही की, मिली भगत से,
घटिया चीजें जो, मिल  है रही

मिड डे मील मैनेजर, नही होने से,
इससे शिक्षकों पे, दबाव है बढ़ जाता
वे एक शिक्षक की, भुमिका मे दिखते हैं कम,
पर उन पर मेस मैनेजर का, रंग है चढ़ जाता

यदि सही, व्यवस्था नही हुई,
तो ऐसे ही हमारे, बच्चे मरते रहेंगे
गुनाहगारों के, अपराधों की सजा,
हम हर दिन, ऐसे ही सहते रहेंगे

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
17-07-2013,wednesday,10 pm,

pune.maharashtra.

Tuesday, 16 July 2013

"ऐसे उद्गार हमारे नेताओं के"

तुम्ही मेरे मालिक हो प्रियवर,
सखा , मित्र सब तुम ही हो
मेरे प्राणनाथ परमेश्वर तुम,
मेरे पूरण  काम तुम ही हो

सडकें बनवा देंगे, घरों तक हम,
नालियां शीघ्र खुदवायेंगे
बिजली-पानी का उचित प्रबन्ध,
हम भुमि को उपजाऊ बनायेंगे

रोजगार मुहैया सब को होंगे,
जन-जन मे शिक्षा का जगरण होगा
भ्रष्टाचार मिटायेंगे हम,
और सब को आने जाने का साधन होगा

रहने के लिये सब को घर होंगे,
मंहगाई से हम तुम्हे उबारेंगे
इस बार यदि जीत गये तो,
हम तुम्हे खुशियों से नहलायेंगे

ऐसे उद्गार  हमारे नेताओं के,
अब गली-गली मे गूजेंगे
मिठी बोली बोल के वो,
हमारे वोटों को लूटेंगे
मिठी बोली बोल के वो,
हमारे वोटों को लूटेंगे

कवि मोहन श्रीवास्तव
http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2013/07/blog-post_16.html

13-08-1999,friday,8.30pm,
chandrapur,maharashtra.