Friday, 9 August 2013

रो रही हमारी भारत माता

रो रही हमारी भारत माता,
अपने बेटों की, कुर्बानी पर
क्रोध से ये पीस, रही है दाँत,
हमारे दुश्मनों की, नादानी पर

अब बहुत सह लिया है हमने,
अब और अधिक, बर्दास्त नही
वे मार रहे हमारे, बेटों को,
और हम कहते, कोई बात नही

ये दिल है माँ का, कोई पत्थर तो नही,
जो हर जख्मों को, सहता जाए
अपने बेटों की, आहुति पर,
ये चैन से तो, रह पाए

हम मित्रता, चाहते हैं उनसे,
पर दुश्मनी तो, उनकी आदत है
वे हसते रहते हैं, हम पर,
कि देखो कैसा, ये भारत है

हर एक की कोई, सीमा होती है,
और वे सीमा को, अपने लांघ रहे
वहां की निकम्मी सरकारें,
हमसे युद्ध हो चाह रहे

पर हम नहीं चाहते, युद्ध हो उनसे,
वे पहले से तो, हैं मरे हुए
वे गाल बजाते हैं, रह-रह कर,
पर अन्दर से, हमसे डरे हुए

जब हम नहीं चाहते, युद्ध हो उनसे,
तो हम उनसे सारे, रिश्ते बंद करें
वे मित्र हमारे, कभी हो सकते ही नही,
फिर उनसे हम क्युं, कोई सम्बन्ध करें
वे मित्र हमारे, कभी हो सकते ही नही,
फिर उनसे हम क्युं, कोई सम्बन्ध करें....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
08-08-2013,thursday,2am,
pune.m.h.




Thursday, 8 August 2013

आपको हो मुबारक ईद का दिन

आपको हो मुबारक, ईद का दिन,
रात खुशियों के, रंग से भरा हो
जींदगी हो, उजाले से जैसे,
आंगन खुशियों से, पल-पल भरा हो

जब कदम आप के, हों जमीं पे,
कांटे भी फूल, बन जाये उस पल
नेकी की राह, पर हर कदम हो,
कोई गम ना, सताए किसी पल

आद-औलाद से, घर भरा हो,
दिल मे हर पल, खुदा का बास हो
हर मोड़ पे, इन्सानियत हो,
रहम दिल का, खजाना आप के पास हो

काम ऐसे ,रें आप जग मे,
लोग दिल से, दुआएं दे आप को
चमके आप जैसे, चाँद और सितारे,
याद रखें सभी, आपके नाम को

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
07-01-2000,friday,10:30am,

chandrapur,maharashtra.