Sunday, 29 September 2013

खादी (रो रहा है खादी आज दर्द से)

रो रहा है खादी आज दर्द से,
बदनामी के नामो से !
खो रहा है अपनी आज ये ईज्जत,
उनके झूठे पहिनावे से !!

याद आ रहे इसे है गांधी,
पटेल, शास्त्री, सावरकर  !
उनके जमाने मे मिलता था,
ढेरों इसको आदर !!

पर आज की खादी होती जा रही है,
भ्रष्टाचार की परिचायक !
जिसे आज पहन कर लूट रहे देश को,
साधू-नेता या नायक !!

आज जहां-जहां है खादी,
वहां-वहां भ्रष्टाचार भी है !
जिस विभाग मे नही है खादी,
वहां सत्य के कुछ आसार है !!

दिल है खादी,जान है खादी,
खादी सत्य का पर्याय है !
त्याग भरा हो जीवन मे,
इसका यही बस आय है !!

खादी ओढ़ो ,बिछावो खादी,
खादी पहनों अच्छे से अच्छा !
पर इसे पहनने के पहले,
ये दिल तो हमारा हो सच्चा !
पर इसे पहनने के पहले,
ये दिल तो हमारा हो सच्चा !
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१०/१०/२००४,रविवार,रात्रि ०.५५ बजे,
चिन्चभुवन,नागपुर(महाराष्ट्र)



Saturday, 28 September 2013

हिंदी बेचारी घुट रही है आज

हिंदी दिवस व, हिंदी साल का,
हम औपचारिकता, निभाते हैं ।
पर अपने, बिबी-बच्चों को,
अंग्रेजी मे, शोध कराते हैं ॥

अंग्रेजी बोलना-अंग्रेजी पढ़ना,
के हम नीति पर, चलते हैं ।
हेलो और हाऊ आर यु से,
हम अंग्रेजी मे, अभिनंदन करते हैं ॥

हिंदी बेचारी, घुट रही है आज,
अंग्रेजी के, अत्याचारों से ।
अपने ही देश मे, बिदेशी सी हो गई,
अंग्रेजी के, तीब्र कटारों से ॥

हिंदी मे बोलकर, वोट को लेते,
फिर मंत्री बन जाते हैं ।
अंग्रेजी मे, शपथ हैं लेते,
फिर हिंदी बोलने मे, वे शर्माते हैं ॥

अब हिंदी मे, पढ़ो-पढ़ावो,
जिसमें राष्ट्रियता का, अंकुर पनपता है ।
सिखना है तो, चीन व रशिया से सिखो,
जहां बच्चा-बच्चा, अपनी भाषा पे गुरुर करता है ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.bloggspot.com
22-12-1999,wednsday,5.10pm,
chandrapur,maharashtra.


Friday, 27 September 2013

पर आज मिडिया एक, व्यवसाय हो गया है

भारत की तरक्की, में बड़ा हाथ,
अब की हमारी, मिडिया का है ।
पल-पल मिलती, हमको खबरें,
ये कमाल की नेट की, दुनिया का है ॥

दुरदर्शन का तो, कोई जवाब नहीं,
जो सरकारों से, ही चला करता ।
आकाशवाणी का, भी यही हाल,
जो निष्पक्ष बात, नहीं करता ॥

निजी चैनलों के, आने से,
भारत में मिडिया क्रांति आई ।
हर तरह की,  खबरें देकर,
वे हम सब के, दिल मे छाई ॥

पर आज मिडिया एक, व्यवसाय हो गया है,
जहां बस पैसे ही, कमाना मकसद है ।
विग्यापन से लेकर, समाचारों तक,
इनमें भ्रष्टाचार, चरम पर है ॥

स्टिंग आपरेशनों को करके,
इनमें पैसे खुब, वसूले जाते ।
खबरें प्रसारित, करने से पहले,
मोल भाव हैं, किये जाते ॥

पर आज की ऐसी, परिस्थिति में भी,
कुछ चैनल, भ्रष्टाचार से दूर हैं ।
वे अपनें निष्पक्ष बात से,
दर्शकों में बहुत मशहूर हैं ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

05-08-13,monday,6.30 pm,
pune,m.h