Tuesday, 18 March 2014

हमे गर्व बहुत है उन पर,वे पिता हमारे हैं

वे हम सबके दुलारे हैं,वे इस जहां से न्यारे हैं
हमें गर्व बहुत उन पर,वे पिता हमारे हैं

जब गर्भ में मैं आया,माँ तो खुश थी मेरी
पर पिता के दिल की खुशी,बस माँ ही बता सकती

जब जनम हुआ मेरा,मेरे पिता बहुत हैं खुशी
जब रोता हूं मैं कभी,वे होते बहुत दुःखी

जब पापा हमनें बोला,तो पिता बहुत हैं प्रसन्न।
माँ से कहते तब वो,मैं आज हो गया धन्य

अब मैं नन्हा सा हूं,वे मुझे कंधे पे बिठाते हैं
थपकी देके मुझको,अपने सीने पे सुलाते हैं

अब बड़े हुये हम हैं,हमें विद्द्यालय पढ़ने भेजा
टीचर को कहा उनने,इसे अच्छी शिक्षा देना

हम सब अच्छा पढ़ लें,वे खूब काम किया करते
वे हमें सुख मे रखकर,वे दुःख को सहा करते

पहनावा हो हमारे अच्छे,वे हमे नये पोषाक दिलाते हैं
हम सबके लिये देखो,अपना फर्ज निभाते हैं

हो घर-परिवार हमारा सुखी,बस चाह सदा उनकी
हम कितना भी दुःख सह लें,पर परिवार हमारा हो सुखी

अब मैं बन गया हूं इस काबिल,मेरा ब्याह रचाये है
इक नई-नवेली दुल्हन,मेरे लिये तो लाये हैं

पर पापा का कलेजा बैठा,बेटी की बिदाई में
अपने आंगन की गुड़िया,हुई आज पराई है

हर बाप का ये सपना,मेरा बेटा सहारा बने
दो गज के कफन से वो,मेरे शव को तो ढक दे

मेरी अर्थी उठा करके,मुझे कंधा तो दे-दे
मेरे अन्त क्रिया को वो,अच्छे से तो कर दे

मैं बिदा हो रहा हूं,मैंने अपना फर्ज निभाया है
तुम सब तो खुश रहना,अब ये बाप पराया है

अपनी माँ का ख्याल रखना,मेरी प्राणों से प्यारी का
दुःख-सुख जो सहे थे हमने,मेरी दिल की दुलारी का

वे हम सबके दुलारे हैं,वे इस जहां से न्यारे हैं
हमें गर्व बहुत उन पर,वे पिता हमारे हैं
हमें गर्व बहुत उन पर,वे पिता हमारे हैं.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
16-03-2013,02:00AM,Sunday,(862)

Pune,M.H




Saturday, 15 March 2014

होली की खुशियां सदा बनी रहे

( आप सभी को मेरा प्रणाम, नमस्ते व प्यार
एवं होली की हार्दिक शुभ  कामनाएं )

होली का यह पावन पर्व ,
आप सभी को मुबारक हो !
ईन्द्र धनुष सा जीवन हो आपका,
और धन -बैभव की अच्छी आवक हो !!

कभी कांटा न चुभे पावों मे आपके,
और ना ही जीवन मे उदासी छाए !
मन की ईच्छा पुरी हो,
और सफ़लता सदा मुस्काती आए !!

सूरज की तपती ज्वाला हो या,
ठंडी- बर्फ़ीली हवाएं हो !
नए बहारों से हो सुसज्जित,
व मन की पूरी अभिलाषाएं हों !!

होली की खुशियां सदा बनी रहे,
व नित नई खुशी व प्यार मिले !
मोहन की दिल से यही कामना,
जीवन भर आपको बहार मिले !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)




दिनांक- २८/१०/१९९९,बृहस्पतिवार,शाम-.१० बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)