Thursday, 27 October 2011

तो पति कि जमानत जब्त हो जाती है

शादी-विवाह कि बातें सुनकर,
कुवारों के दिल मे लड्डू फ़ूटते हैं !
आंखों की नीद गायब होकर,
मन मे सुहाने सपने वो बुनते हैं !!

बहुत मान-मनौव्व्ल करने पर,
जब शादी की तारीखें रखी जाती !
शहनाई की गूंज बाजे-गाजे से,
तब बारात दुल्हन के घर मे आती !!

पूरे रश्मों-रिवाज को पुरे कर,
दुल्हन-दुल्हे के घर आती है !
कुछ दिन शांति का राग अलापकर,
फ़िर अशांति के गीत वह गाती है !!

जब नई- नवेली घर आई,
तो अखियां कैसे चार हुए!
पत्नी के घर मे आते ही,
तब दुश्मन अपने घर-द्वार हुए !!

साड़ी- मेकप- बाजार घूमना,
यह उसके लम्बे लिस्ट मे जाता !
विभिन्न तरह के फ़र्माईस से,
फ़िर वो बेचारा पछताता !!

ससुराल-घर पत्नी मे,
उसकी त्रिशंकु कि हालत हो जाती !
यदि पत्नी समझ दार नही मिली,
तो पति की जमानत जब्त हो जाती !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०७/१२/२०००,रात्रि-१२.३५बजे,बॄहस्पतिवार,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)



Sunday, 23 October 2011

दिवाली ने निकाला दिवाला

दिवाली ने निकाला दिवाला,
लोगो के चेहरे लाल हुए !
इस कमरतोड़ मंहगाई से,
लोगो के हाल बेहाल हुए !!

जितनी जिसकी चादर थी,
उसके अंदर ही जिसने खर्च किए !
दिवाली की तरह ही खुशियां,
अपने लिए हर पल ही लिए !!

जिसने भी लोगों को देख-देख कर,
अपने खर्चे अधिक बढ़ाए !
बिना वजह ही वे अपने सिर पर,
कर्जे का बोझ चढ़ाए !!

इसीलिए ही अपनी जितनी आवक हो,
उतने ही खर्चे किए जाए !
चहरे पे मुस्कान हमेशा हो,
और परिवार मे खुशिया नित आए !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक०६/११/१९९९,शनिवार,दोपहर-११.४५ बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)

रोज दिवाली तो उन्ही की रहती

आई दिवाली दुल्हन बन कर,
घर -आंगन की हुई सफ़ाई !
खिड़किया -दरवाजे रंग-बिरंगे,
और दीवारों की हुई रंगाई !!

गली-मुहल्लों की हुई सफ़ाई,
लोगो के रस्ते साफ़ हुए !
पर सरकारी सड़कों के तो,
हाल और बेहाल हुए !!

गड्ढे जगह-जगह पर हैं,
जहा कमर टेढ़ी कर चलना पड़ता !
कहीं-कहीं गंदे पानी के जमाव,
जहा कचरों पर से गुजरना पड़ता !!

कई सरकारी दफ़्तरों मे केवल,
कागज के घोड़े दौड़ाए जाते !
बिना काम किए ही उनपे,
सड़कें,पुल नालिया बनाए जाते !!

रोज दिवाली तो उन्हीं की रहती,
जिनके रिश्वतों से जेब भरे रहते !
मुंह मे दलाली का पान चबाकर,
जिनके ईमान सदा मरे रहते !!

मोहन श्रीवास्तव  (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२०/१०/१९९९९,वुद्धवार,शाम-०७.०५ बजे,
चंद्रपु