Saturday, 29 October 2011

कब तक ऐसे ही सहते रहोगे

कब तक ऐसे ही सहते रहोगे,
उनके अत्याचारों को !
कब तक ऐसे यूं ही डरते रहोगे,
उन आततायियों के दुराचारों से !!

दिन -दहाड़े हत्याएं करके ,
वे खुले आम घूमते है !
अबलावों की ईज्जत लूट के वे,
मस्ती के साथ झुमते है !!

आज अत्याचार हुआ हम पर,
कल तुम पर भी वही दुहराएंगे !
एक-एक कर सब पर वे,
अपना आतंक मचाएंगे !!

अन्याय अत्याचार को सहना,
ये वीरता नही कायरता है !
अपराधियों के सामने सर को झुकाना,
यह विनम्रता नही अराजकता है !!

एकता मे अपरिमित बल है,
आगे बढ़ो और मुकाबला करो !
इसकी उनको सजा दिला,
उनके आतंक को नष्ट करो !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२८/१२/२०००,मंगलवार,रात्रि-०१ बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)

ऐ जीवन तेरे कितने रूप


ऐ जीवन तेरे कितने रूप,
कभी छाव, कभी तो धूप है!
पल भर मे कभी गम का साया,
कभी खुशी के रंग अनूप है!!

कदम -कदम पे संघर्ष है,
चाहे लाख बचे तू जमाने से!
कभी विषाद तो कभी हर्ष है,
जो खतम न हो आसू बहाने से!!

तू सोचे कुछ और क्या हो जाए,
तेरी चाल पलट जाए जीवन!
दिन मे  संग रहे वो तेरे,
पर रात मे बन जाए बिरहन!!

तू बस भूल-भुलैय्या मे भटकता रहे,
पर आश न छोड़ा है तुमने!
तू बस माया के बजरिया मे मचलता रहे,
जब तक श्वाश न छोड़ा है तन ने!!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२७/१२/२०००,वुद्धवार,रात्रि- १२ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)

Thursday, 27 October 2011

यदि हम होते भ्रष्टाचार के मंत्री

यदि हम होते भ्रष्टाचार के मंत्री,
तो हम जी भर के पैसा कमाते थे !
मुंह मे दलाली का पान चबाकर,
हम पाप की गंगा मे नहाते थे !!

भ्रष्टाचार को बढ़ावा कैसे मिले,
इसके लिए नित नई खोज हम करते !
अपने इस खोज के माध्यम से,
हम अपनी तिजोरी भरते !!

ईमानदारी को छोड़ के सब कोई,
 बेइमानी को गले लगावो !
शुद्ध आचरण को दूर भगा,
अब भ्रष्ट आचरण को अपनावो !!

ऐसे विभिन्न तरह के श्लोगन से,
हम भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिलाते !
गिनिज बुक आफ़ वर्ल्ड रिकार्ड मे,
तब हम अपने नाम को दर्ज कराते !!

योजनाएं बनाने से पहले,
उनमे हम भ्रष्टाचार का प्रतिशत रखते !
कई आकर्षक पुरष्कारों से,
हम उन भ्रष्टाचारियों को सम्मानित करते !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०१/१२/२०००,शुक्रवार,सुबह-.२० बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)