Saturday, 4 May 2013

मन मोहिनी शिव की सूरत

भोले बाबा है महान
कर लो उनका गुण-गान
तिनों लोकों मे उनका कोई शानी नही है
उनकी लीला अपरम्पार,
उनका रूप बेमिशाल,
गिरीजा उनकी तो देखो दिवानी हुई हैं॥
भोले बाबा हैं महान.....

चंदा मस्तक पे बिराजे,
देख के काम भी लाजे,
गंगा उनकी तो जटावों मे समाई हुई हैं।
मनमोहिनी शिव की सूरत
जी को ललचाये है मूरत
तिनों लोक तो उनकी दिवानी हुई है
भोले बाबा हैं महान........

बिष को पी रहे त्रिपुरारी
नन्दी बैल की सवारी
उनके मुख से पलक कभी गिरती नही
उनके रूप का नशा
मेरे दिल मे है बसा
उनके सिवा हमे कुछ भी दिखती नही 

भोले बाबा हैं महान...........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
//२०१३,शुक्रवार,शाम बजे,
पुणे महा.





"मेरी कविता रूपी सुहागन की"

खुश रहें आप जहां भी रहें,
मेरा प्यार आप को मिलता रहे
चेहरे पे नही हो मायुशी ,
मुखड़ा गुलाब सा खिलता रहे

आप अथाह ग्यान के सागर हैं,
मै नन्हा बूंद सा उसमे हूं
आप खिलते हुये कमल से है,
मै भवरा आप के बस मे हूं

सुरज हैं आप इस जहां के तो,
मै उससे निकलता किरण सा हूं
आप कहां हिमालय पर्वत तो,
मैं उसमे छोटा कंकड़ सा हूं

मेरी कविता रूपी सुहागन की,
आप सभी श्रृंगार हैं
पसन्द आप का आशिर्वाद स्वरूप,
और आप हमारे प्यार हैं

मै कुछ नही दे सकता हुं आप को,
बस गीतों की ये फ़ुलझड़ियां हैं
अपने हृदय पटल पर इसे जगह दिजिए,
मेरे लिये यही मोती मणिया हैं,
मेरे लिये यही मोती मणियां हैं

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१९--२०१३,मंगलवार,रात्रि-.३५ बजे,
पुणे महा.


Saturday, 28 April 2012

आप ऐसे ही पल-पल तो मुस्काइए

पीते हैं गम को आप हसते हुए,
दर्द होता है तो आप मुस्काते हैं !
प्यार से कोई दे यदि ज़हर आपको,
आप हसते हुए उसको पी जाते हैं !!
पीते हैं गम को.............

आप विश्वाश कर लेते जल्द ही,
लोगों की विष भरी बातें पी जाते हैं!
आप हैं कि किसी से भी डरते नही,
बातें करने मे फ़िर आप शर्माते हैं!!
पीते हैं गम को..........

कन्धों पर  आपके भार कितना भी हो,
आप हसते हुए उसको ढो लेते हैं !
दुख भरे आंसू आंखो मे आपके,
आप हसते हुए दिल मे रो लेते हैं !!
पीते हैं गम को.................

आप नाराज होते कभी हैं नही,
आप गुस्से को भी हंस के पी जाते हैं !
आप मायुश भी होते हैं नही,
आप मुस्का के औरों मे रह जाते हैं !!
पीते हैं गम को............

घायल सी कर रही ये अदा आपकी,
आप अपने भी संग मे तो मुस्काइए !
हो मुस्कुराहट भरी जिन्दगी आप की,
आप ऐसे ही पल-पल तो मुस्काइए !!

पीते हैं गम को आप हसते हुए,
दर्द होता है तो आप मुस्काते हैं !
प्यार से कोई दे यदि ज़हर आपको,
आप हसते हुए उसको पी जाते हैं !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
                                                             www.kavyapushpanjali.blogspot.com
१९/६/१९९९,शनिवार,शाम ६ बजे,
चन्द्रपुर,महा.