Tuesday, 20 August 2013

किसी-किसी बहना के भाई हैं दूर


किसी-किसी बहना के, भाई हैं दूर,
उन्हें अपनी भइया की, याद आती है खूब ।
किसी-किसी भइया की, बहना है दूर ।
उन्हें अपनी बहना की, याद आती है खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

साल के सब दिन मे, ये दिन महान है ।
दोनो को इक-दुजे की, जरुर आती याद है ॥
ये दिन दोनो नही, पाते हैं भूल ।
उन्हें अपनी भइया की, याद है खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

भइया को मेरी, ऊमर लग जाये ।
कभी भी उन्हें, कोई दुःख ना सताये ।
भइया का जीवन, जैसे रहे कोई फूल,
उन्हें अपनी भइया की, याद आती खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

भइया तो मेरा अपना, लाखों में एक है ।
दिल तो भइया का मेरे, बड़ा ही नेक है ॥
हमे अपने भइया पे, बहुत ही गुरुर है ।
उन्हें अपनी भइया की, याद है खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

अपनी-अपनी बहना पे, भइया को नाज है ।
बहना हमारी हम सब की, तो लाज  है ॥
नयनों मे नीर, भर आता जरुर ।
उन्हे अपनी बहना की, याद आती है खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

बहना को देता भाई, दिल से दुआ है ।
उसकी खुशी मे ये, सारा जहां है ॥
दिल मे तो है वो मेरे, चाहे है वो दूर ।
उन्हे अपनी बहना की, याद आती है खूब ॥
किसी-किसी बहना के......

किसी-किसी बहना के, हैं भाई दूर,
उन्हें अपनी भइया की, याद आती है खूब ।
किसी-किसी भइया की, बहना है दूर ।
उन्हें अपनी बहना की, याद आती है खूब ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
21-08-2013,wednesday,10am,(731),
pune,maharashtra.




राखी बांधे प्यार से

प्यारी-दुलारी बहना रानी,
राखी बांधे प्यार से ।
मंगल तिलक लगा कर के,
स्वागत करती हार से ॥

आरती उतारे अपने भइया की,
और खिलाती कई मिष्ठान है ।
लम्बी उम्र की दुआ मांगती,
ये भाई-बहन का प्यार है ॥

शपथ लेते हैं हर भाई,
अपने बहनों की लाज बचाने की ।
चिन्ता रहती है उनको भी,
अपने बहनों के सम्मान की ॥

प्यारी-दुलारी बहना रानी,
राखी बांधे प्यार से ।
मंगल तिलक लगा कर के,
स्वागत करती हार से ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
23-08-1999,monday,8.40pm,

chandrapur,maharashtra.

Monday, 19 August 2013

आया राखी का त्योहार

आया राखी का त्योहार,
भाई-बहनों का प्यार.
कैसे आज ये मिलने लगे ।
बहना राखी बांधे आज,
भाई देता आशिर्वाद,
खुशी आखों से तो झरने लगे ॥

बहनें खिलाती पकवान,
दुआ मांगती भगवान,
मेरी ऊमर भी भइया को लगे ।
चाहे रहें कहीं दूर,
उनको भइया पे गुरुर,
वो तो लाखों मे एक लगे ॥

उनका भाई सुरज जैसा,
जग मे कोई नही वैसा,
वो तो भाइयों पे नाज करे ।
उनको इतना है अहसास,
भइया बचायेंगे लाज,
जब भी उनपे कोई बिपदा पड़े ॥

भाई रखते मन मे इच्छा,
हम करेंगे तेरी रक्षा,
कभी कोई आंच न तुझपे आये ।
कभी होना ना उदास,
हम रहेंगे तेरे पास,
कभी तेरी लाज न जाने पाये ॥

आया राखी का त्योहार,
भाई-बहनों का प्यार.
कैसे आज ये मिलने लगे ।
बहना राखी बांधे आज,
भाई देता आशिर्वाद,
खुशी आखों से तो झरने लगे ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
18-08-1999,wednsday,2.10pm,
chandrapur,maharashtra.