Sunday, 1 September 2013

देवी मां स्तुति(हे मा मेरी करुणा मई)

हे मा मेरी करुणा मई,आशिष पाना चाहते !
हम दीन-हीन गरीब हैं,चरणों मे आना चाहते !!
हे मा मेरी.............

तुम हो जगत की मातु मा,हम बाल सब तुम्हारे हैं !
रखवाली करती हो मातु तुम,हम भक्त तेरे प्यारे हैं !!
हे मा मेरी...............

कोई नही अपना है मा,सिर्फ़ तुझ पर आश है !
तेरी दया की दृष्टि पर ,अपना तो मा विश्वाश है !!
हे मा मेरी..................

जो पास मे है मा मेरे,सब कुछ तुम्हारा ही तो है !
तू एक है,तेरे रूप अनेक,तू कई नामों से विख्यात है !!
हे मा मेरी.......................

तेरा ध्यान तो आता नही,मोहन तो मा अन्जान है !
अपराध को कर दो छमा,हम बाल सब नादान हैं !!

हे मा मेरी करुणा मई,आशिष पाना चाहते !
हम दीन-हीन गरीब हैं, चरणों मे आना चाहते !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

२८//१९९९,चन्द्रपुर महा.

Tuesday, 27 August 2013

श्री कृष्ण भजन (मै तो प्रेमी से मिलने आई)

मै तो प्रेमी से मिलने आई रे
मन्दिर जाने के बहानें !
मै तो अपने से ही शर्माई रे
मुझे देखे बच्चे सयानें !!
मै तो प्रेमी से मिलने ....

उसकी सावलि सुरत कैसी
जो देखे बन जाए उसकी !
उसके आखे है कजरारे
तन पे वो पिताम्बर डारे
मै तो उससे ही मिलने आई रे
मन्दिर जाने के बहाने...

कोई उसको देख पाता
अपने से ही वो शर्माता
मै उसके दर्शन करती हूं
मै उसको दिल मे रखती हूं
मै तो उसकी दिवानी हो गई रे
मन्दिर जाने के बहाने....

उसकी है अनोखी माया
उसके ना है तन और काया
मै उसकी पागल प्रेमी हूं
दिन रात उसी की पूजा करती हूं
मेरा वो है बहुत उपकारी रे
मन्दिर जाने के बहाने...

कर मे बासुरी माथे पे तिलक है
उसके सर पर मोर पंख है
वो लुक-छिप कर मुझे देखा करता
जैसे हो हमसे डरता
मै उसी मे मगन हो जाऊं रे
मन्दिर जाने के बहाने

मै तो प्रेमी से मिलने आई रे
मन्दिर जाने के बहाने......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)

www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक- १३//१९९१ ,सोमवार .शाम ,.२० बजे,

एन.टी.पी.सी. ,दादरी,गाजियाबाद,(.प्र.)