Wednesday, 6 November 2013

छुआ-छूत कभी बंद नहीं होगा



आदि काल से चला रहा है ये,
और आगे भविष्य मे रहेगा भी
छूआ-छूत कभी बंद नहीं होगा,
इतिहास सदा ये कहेगा भी

चार वर्ण पहले भी थे,
और चार वर्ण तो अब भी हैं
ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र थे पहले,
ये चार श्रेणियां अभी भी हैं

सरकारी या हो निजी क्षेत्र,
सबमे चार तरह की व्यवस्था आज भी है
प्रथम,द्वितीय.तृतीय चतुर्थ,
ये श्रेणियां आज भी हैं

छुआ-छूत का भेद-भाव,
इन सबमें कड़ाई से है चलता
अनुशासन भंग हुआ यदि किसी से,
तो सजा उन्हें है अवश्य मिलता

मित्रों इसिलीये जरूरी है शिक्षा,
जिससे हम कभी भी आगे हैं बढ़ सकते
शिक्षित होकर हम समाज-राष्ट्र को,
और भी जागरूक हैं कर सकते

आदि काल से चला रहा है ये,
और आगे भविष्य मे रहेगा भी
छूआ-छूत कभी बंद नहीं होगा,
इतिहास सदा ये कहेगा भी
छूआ-छूत कभी बंद नहीं होगा,
इतिहास सदा ये कहेगा भी.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.in
31-10-2013,Thursday,06:00am,(785),

Pune,Maharashtra

Monday, 4 November 2013

मत मारो हमारी गौ माँ को

मां से भी बढ़कर गौ मां है हमारी,
फिर मां का कत्ल क्यों हो रहा है
हम देख के भी अंजान से हैं,
ये हमारे अक्ल को क्या हो रहा है

ये कैसा दुर्भाग्य है हमारा,
कि हम अपने मां की रक्षा नही कर पाते
जिस मां का हो हमने दूध पिया,
हम उसे सुरक्षा नही दे पाते

मत मारो हमारी गौ मां को,
गाय हमारी माता है
कर जोड़ के विनती है सबसे,
ये सारे जहां की बिधाता है

वोटों के सौदागरों से है विनती,
कि गौ हत्या पर पुर्ण प्रतिबंध लगाया जाये
इनकी सम्पूर्ण  सुरक्षा हो,
ऐसा प्रबंध कराया जाये
इनकी सम्पूर्ण  सुरक्षा हो,
ऐसा प्रबंध कराया जाये....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
04-09-20123,wednesday,4pm,(745),
pune,maharashtra.




Thursday, 31 October 2013

दिपावली का पावन पर्व यह

दिपावली का पावन पर्व यह,
आप सभी को मुबारक हो !
राहें रोशनी से भरी रहे,
और धन -बैभव की अच्छी आवक हो !!

कभी कांटा न चुभे पावों मे आपके,
और ना ही जीवन मे उदासी छाए !
मन की ईच्छा पुरी हो,
और सफ़लता सदा मुस्काती आए !!

सूरज की तपती ज्वाला हो या,
ठंडी- बर्फ़ीली

हवाएं हो !
नए बहारों से हो सुसज्जित,
व पूरी अभिलाषाएं हो !!

आज की खुशिया सदा बनी रहे,
व नित नई खुशी व प्यार मिले !
मोहन की दिल से यही कामना,
जीवन भर आपको बहार मिले !!

मोहन श्रीवास्तव(कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक- २८/१०/१९९९,बृहस्पतिवार,
शाम-.१० बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)

असली दिवाली तो यही होगी

खुश होके दिवाली मनाए हम,
और घरो मे दीप जलाएं !
नफ़रत को जड़ से मिटा करके,
वहा प्यार का अंकुर पनपाए !!

कोइ भी घर मे अंधेरा ना हो,
और ना ही कोई भूखा सोए !
दूध के लिए व्याकुल हो करके,
ना ही कोइ बच्चा रोए !!

लोगो को देख-देख करके,
अपने खर्चे नही बढ़ाए !
जितना अपना चादर हो,
उतने ही पैर फ़ैलाएं !!

असली दिवाली तो यही होगी,
लोगो के दिलों मे प्यार की ज्योति जलाएं !
दुश्मनी को दिल से भुला करके,
वहां दोस्ती का हाथ बढ़ाए !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२०/१०/१९९९,
वुद्धवार,शाम ५ बजे,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)