Saturday, 22 July 2023

नाचा सम्मान समारोह बेबीलोन होटल रायपुर

पण्डित सुन्दर लाल शर्मा अलंकरण सम्मान शोभामोहन श्रीवास्तव जी को

त्रिवेणी नाग पुस्तक विमोचन समारोह

हमारे कान्हा जी

त्रिवेणी नाग पुस्तक विमोचन




त्रिवेणी नाग पुस्तक विमोचन






त्रिवेणी नाग पुस्तक विमोचन


छत्तीसगढ़ के महिमा छत्तीसगढ़ी

Friday, 21 July 2023

छत्तीसगढ़ दर्शन

आईओ

बरसा ऋतु आय गई जब से

(दुर्मिल सवैया)

"बरसा  रितु आय गई जब से"


बरसा रितु आय गई जब से ,जुबती जइसे मुसकाय धरा | 

बुँदे जिमि पायल सी छनके , चहुँ ओर उड़ाय रहे बदरा  || 

मदमस्त हुए सब जीव महा , धरती लहराय रही अंँचरा  | 

नवअंकुर फूट रहे थल में,  सब दादुर  देवत हैं  पहरा  || १|| 


मिल ताल - तलाइ  रहे अब तो  , सरिता जल  सिंधु समाय रही | 

नभ प्यास बुझाय रहा वसुधा , तरु से लतिका लिपटाय रही || 

बगियांँ अब मोर भी नाचि रहे , अरु कोयल गीत सुनाय  रही | 

जिनके पिय हैं  परदेश बसे , बिरही मन में  अकुलाय रही || २|| 


कृषिराज चले अब  खेत सभी , जन ग्वालन धेनु चराय रहे | 

सखियाँ सब धान लगावत हैं  ,  बगुले नित ध्यान लगाय रहे  || 

चहु ओर धरा अब होय हरी, रविराज लुकाय छिपाय रहे | 

जब मध्यम तेज बयार चले , तरु शाख हिलाय डुलाय रहे || ३|| 


बदरा मिरदंग बजावत हैं ,  नभ में बिजुरी चमकाय रहे | 

छपरी जिनकी  अब टूट रही , धरिके सिर ओ बिलखाय रहे || 

बरसे जबहीं दिन मेघ घने , बस बैठि सभी बतलाय रहे | 

सब खाय  रहे भजिया - गुँझिया , सजना सजनी इतराय रहे || ४ || 


कवि मोहन श्रीवास्तव

http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2018/07/blog-post_22.html


रचना क्रमांक ;-1083 

22 / 07 /2018 , durg .c.g 




 

Saturday, 10 June 2023

"क्या कहूं आपका हुश्न गजब ढा रहा"

"क्या कहूं आपका हुश्न गजब ढा रहा"

आपके खूबसूरत वदन के लिये,
हमें तारीफ करना तो आता नही ।
आप खशबू से भरी तो कोई फूल हैं,
जिसमें भंवरा बनना चाहता हर कोई ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

जुल्फें हैं आपकी बादलों की तरह,
जो गगन से धरा पे हैं आ रहे ।
आपके केश जिसको भी छू जायें अगर,
वे तो मदहोश से तो हुए जा रहे ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

मुखड़ा तो आपका चाँद की ही तरह,
आंखे कजरारे मन को हैं भा रहे ।
कानों के झुमके रह-रह के तो हिल रहे,
जैसे कोई गजल को हों गा रहे ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

गालों का रंग गुलाबी लिए आपका,
नथिया तो नाक का है ललचा रहा ।
मोतियों जैसे तो दांत हैं आपके,
होठ तो आपका है मुस्का रहा ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये....

सीना तो आपका लहरों की तरह,
लोगोँ का धड़कन जिससे बढ़ा जा रहा ।
बलखाती कमर एक झुकी डार सी,
नाभी से तो नशा सा चढ़ा जा रहा ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

हाथों की तो कलाई ऐसे लग रहे,
जैसे कोमल-मुलायम कोई डार हो ।
संगमर्मर की तरह पांव हैं आपके,
चलना नागिन जैसी कोई चाल हो ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

निले सागर सा ढका है वदन आपका,
जिसमें अंग-अंग झलक सा रहा आपका ।
क्या कहूं आपका हुश्न गजब ढा रहा'
दिल तो सागर सा गहरा है आपका ।।
आपके खूबसूरत वदन के लिये.....

आपकी हर अदा पे गिर रही बिजलियां,
हर कोई आज मदहोश हुआ जा रहा ।
कर मैं सकता नहीँ तारीफ आपका,
मुझको भी आपसे प्यार हुआ जा रहा ।।

आपके खूबसूरत वदन के लिये,
हमें तारीफ करना तो आता नही ।
आप खशबू से भरी तो कोई फूल हैं,
जिसमें भंवरा बनना चाहता हर कोई ।।

चित्र: गूगल से सादर लिया गया।

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
(949) mob:9009791406
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
11-06-2015,Thursday,11:00A.M.

Monday, 24 April 2023

"मत मारो तुम मुझे कोख मेंं"

(कुकुभ छंद)
"मत मारो तुम मुझे कोख मेंं"

मेरे भी अरमान बहुत हैं, हो जाऊं मैं बलिहारी ।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि अधारी ।।

पापा मत निर्दयी बनो तुम,गुड़िया मैं हूँ तुम्हारी।
घर आँगन को महकायेगी, मेरी भी किलकारी ।।
जीवन दे दो तुम मुझको तो,  सदा रहूंगी आभारी ।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि अधारी ।।

अम्मा मुझको आने दो ना, कभी न तुम्हें रूलाउंगी ।
पापा  जब आयेंगे थक कर, लाके नीर पिलाऊंगी ।।
हँसकर सुख दुख मैं झेलूंगी,सुन लो बात हमारी।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि अधारी ।।

बर्तंन चौका झाड़ू पोछा, खाना पका खिलाऊंगी ।
साथ साथ मैं करूँ पढ़ाई, अव्वल नंबर लाऊंगी ।।
सीख सिलाई करूँ कढ़ाई, मैया मैं तेरी सारी ।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि अधारी ।।

भइया को राखी बांधूंगी, अपना फर्ज निभाऊंगी ।
दोनों कुल का मान बढ़ाकर, जग में नाम कमाऊंगी ।।
अतिथि पधारेंगे जब घर में, कर लूंगी सेवादारी ।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि  अधारी ।।

मेरे भी अरमान बहुत हैं, हो जाऊं मैं बलिहारी ।
मत मारो तुम मुझे कोख मेंं, मैं ही हूँ सृष्टि अधारी ।।

कवि मोहन श्रीवास्तव

Friday, 21 April 2023

"पर्व उत्सवों त्योहारों से, भारत की पहचान"


"पर्व उत्सवों त्योहारों से,  भारत की पहचान"

पर्व उत्सवों त्योहारों से,  भारत की पहचान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।


होते हैं दिन कितने अच्छे , हर त्योहार मनाते हैं।

घृणा द्वेष को दूर भगाकर, प्रेम वहां विखराते हैं।।

चैत्र मास के नए वर्ष में, खुशियां खूब लुटाते हैं।

घर आंगन व गली चौक में,  तोरण ध्वजा लगाते हैं।।

धूम धाम रहती है भारी, माता के नौराते में।

नौ दिन करके ब्रत उपवासा, भजन करें जगराते में।।

जन्मोत्सव हनुमान राम का  , करें मनाकर ध्यान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।1।।


वैशाखी में बल्ले बल्ले, खुशी मनाते संग दादी।

परशुराम जयंती अक्षय तृतिया ,  गुड्डा गुड़िया की शादी।।

जगन्नाथ रथ की यात्रा को , देश मनाता है सारा।

बलराम सुभद्रा संग कृष्ण का, भक्त करे हैं जयकारा।।

पावन श्रावण में भोले का, कावड़ यात्रा बम बम बम।

नागपंचमी  भाई बहना,का पावन रक्षाबंधन ।।

भाद्र महिना तीज व कजरी, करें बेटियां गान ।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।2।।



मथुरा सहित सभी जगहों में, कृष्ण जन्म उत्सव भारी।

नैनों में रख छवि मोहन की, खुशी मनाते नर नारी।।

शारदीय नवरात्रि मनाते, क्वार मास में भक्त सभी।

अम्बे रानी की महिमा को, गाते सुनते लिखें कवी।।

महिषासुर बध कर मां दुर्गा, मोद धरा विखराई थी।

भगवान राम ने रावण बध कर, विजय लंक पर पाई थी।।

अधर्म हारता धर्म जीतता , देत दशहरा  ज्ञान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।3।।


घर आंगन की करें सफाई , कार्तिक मास दिवाली।

गणपति लक्ष्मी पूजा करते , कहीं पूजते मां काली।।

घर घर दीप जलाकर करते , मनमंदिर में उजियारा।

भ्रात दूज गोवर्धन पूजा, कान्हा जी का जयकारा।।

देव उठउनी एकादशी में,हरि का ध्यान लगाते हैं।

तुलसी मइया के विवाह को, हर्षोल्लास मनाते हैं।।

मार्गशीर्ष में देव दिवाली, पुण्य मास में दान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।4।।


पौष मास में मकर संक्रांति , का त्योहार मनाते हैं।

नदियों तीर्थों में लोग नहाकर, श्रद्धा भक्ति बढ़ाते हैं।।

माघ मास का मौनी अमावस,बसन्त पंचमी सतरंगी।

फागुन में होली संग जीवन, होता है रंग विरंगी।।

प्रतिदिन त्योहार अनेकों , मोहन सभी मनाते हैं।

मन में प्रभु का ध्यान लगाकर, करुणा दया लुटाते हैं।।

सभी सनातन संस्कारों को, कहते वेद पुरान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।5।।


पर्व उत्सवों त्योहारों से,  भारत की पहचान।

सत्य सनातन धर्म मार्ग में, जीवन है आसान।।


कवि मोहन श्रीवास्तव