Saturday, 15 October 2011

हो अपना चमन इस धरा पे ऐसा


हो अपना चमन इस धरा पे ऐसा ,
जहां नफ़रत की कोइ दीवार न हो  !
ईंसानियत भरा हो जन-जन मे ,
जहा हिंसा व अत्याचार न हो !!

फ़ूलों की तरह सभी मुस्काते रहें,
जहां दुख के न कोइ आंसू हों !
प्यार-दुलार से रहे सभी ,
जहां खुशियों के छलकते आंसू हों !!

आदर-सम्मान सभी को मिले ,
जहां ऊंच-नीच का कोइ भेद न हो !
जातियता का कोइ बन्धन न हो ,
और ईंसानियत एक बस मजहब हो !!

जीव-जन्तु या कोइ भी प्राणी,
सब को जीने का अधिकार हो !
सभी जीवों पर दया करो ,
यह सबके दिल की पुकार हो !!

हर उत्सव मनाएं सब मिल-जुल के,
जहां खुशियां ही खुशियां हो !
हर सुबह एक नई सुबह हो ,
जहां धूप -छांव की बगिया हो !!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-१६/०५/२००० ,मंगलवार ,शाम ६.५५ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र),

हम भारत के वीर सिपाही


हम भारत के वीर सिपाही ,
जो वतन पे शहीद हो जाते हैं !
अमर होते है, हम मरते है नही ,
हम अपने देश की शान बढ़ाते हैं !!

हिन्दू-मुस्लिम -सिक्ख=इसाई,
बस हम अपने घरों तक ही रहते हैं !
देश की बात जब कही आती है तो ,
हम सब पहले भारतीय बनते हैं !!

होली-ईद-क्रिशमस-वैशाखी,
हम सब मिल के वहां मनाते हैं !
शरहद की रक्षा हंसते-हसते करते,
और गर्व से तिरंगा फ़हराते हैं !!

हमे भी अपने बेटे -बेटियों की,व,
मां-बाप की याद तो आती है !
पत्नी की वह मधुर मुस्कान,
बहना की राखी से आंखे भर आती हैं!!

पर अपना घर तो यह सारा भारत है,
जिसे हम अपने जान से जादा मानते हैं !
इसे कभी कोइ बुरी नज़र नही लगने पाए,
हम इसे प्राण से जादा जानते हैं !!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-०७/०५/२००० ,रविवार , शाम - ४.४५ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)

तेरी दया जो हो जाए मैया

तेरी दया जो हो जाए मइया ,
सब बिगड़े काम बन जाते हैं !
आंसू से भरे हों जिनके दिल ,
तेरी दया से वो मुस्काते हैं !!

उन दुखियों के लाज बचाती हो ,
जो तुझपे आश मा रखते हैं !
तूं तो उनके भाग्य बदल देती !
जो विश्वाश मा तुझपे  रखते हैं !!

जिनकी गोदें है सूनी मा,
उन्हे फ़ूलों से तुम भर देती !
जिनकी मांगे है सूनी मा ,
उन्हे मन चाहा तुम वर देती !!

तुझे नही चाहिए मणियों का हार ,
ना ही पकवानों की भूखी !
बस श्रद्धा की भूखी हो मइया ,
चाहे कोई खिलाए रुखी-सुखी !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०९/०४/२००० , रविवार, सुबह - .३० बजे ,

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)

पर मंहगाई व गर्मी की वजह से


मंहगाई से तो बुरा हाल ,
पर गर्मी से हाल बेहाल हुए !
आग उगलते सूरज से ,
लोगों के चेहरे लाल हुए !!

दिन मे बरसते अंगारे ,
रात मे कुछ ठंडी रहती !
पंखे -कूलर की हवावों से ,
गर्मी से कुछ राहत मिलती !!

गमछे-दुपट्टे सर मे लपेटे ,
सब धूप से बचने की कोशिश करते !
ठंडे -शीतल पेय पदार्थों से ,
लोग अपने को ठंडा रखते !!

परीक्षा खत्म हुए बच्चों के ,
लम्बी छुट्टीयां इन्हे मिली !
पर भयानक गर्मी के कारण  ,
घर मे ही इन्हे कैद मिली !!

तन से पसीना निकल रहा ,
मन मे ठंड की आशा रहती !
पर मंहगाई व गर्मी की वजह से ,
लोगों के दिलों मे निराशा ही रहती !!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक -०४/०४/२००० ,मंगलवार रात -१०.०५ बजे ,
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)


जीत के लिए तरसते है हम


खेलों मे खेल क्रिकेट खेल ,
जिसके सामने सभी खेल फ़ीके पड़ जाते है !
गर्मी-बरसात या जाड़ा हो,
इसकी बुखार से सभी अकड़ जाते है !!

तारीख मैच कि रखे जाने से ,
लोग परिणाम कि तैय्यारी करने लगते !
इंडीया ए मैच जितेगा ,
इस गणित मे सभी उलझे रहते !!

पर गणित फ़ेल हो जाते है सबके ,
जब ए हमे हार का स्वाद चखाते हैं !
बेशर्मी की चादर ओढ़कर ये,
चैन की नींद सो जाते हैं !!

बल्लेबाज़ी का हाल मत पूछो ,
तुम चलो हम भी आते है !
गेंद बाजी मे होती धुनाई ,
फ़िर ए गेंदे फ़ेकने से घबराते हैं !!

लगता है ये देश के लिए खेलते है कम ,
और पैसों के लिए खेलते जादा हैं !
जीत के लिए तरसते है हम ,
पर ये हारने पर ही आमादा हैं !!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-२९/०३/२००० ,वुद्धवार ,शाम ७ बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)

हम शेरे दिल है भारत के


आगे बढ़ने वाले हमारे कदम ,
अब पिछे मुड़ के नही देखेंगे !
अग्नि -पर्वत -आंधी-पानी ,
ये हमे नही अब रोकेंगे !!

माथा ऊंचा रहेगा सदा ,
और गर्व से सीना फ़ुला होगा !
आंखों से शोले बरसते होंगे ,
और दिल तो सदा ही खुला होगा !!

हमे गुरू जगत वाले कहते ,
पर हमें गुरुता का अभिमान नही !
अपमान नही किसी का करते हम ,
और चाहिए हमे सम्मान सही !!

अन्याय पसंद नही है हमे ,
हम न्याय पे चलते जाएंगे !
हम शेरे दिल हैं भारत के ,
हम वतन के लिए शीश कटाएंगे !!

अहिंसा हमे प्यारा है ,
और हम हिंसा से नफ़रत करते हैं !
गुलामी पसंद नही है हमे ,

हम आजादी की ईज्जत करते हैं !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२७/०३/२००० ,सोमवार  शाम - .३० बजे

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)