Thursday, 27 October 2011

पिते शराब हो क्युं ऐसी



पिते शराब हो क्यूं ऐसी,
जहा नफ़रत ही नफ़रत तुम्हे मिले!
तुम्हारे मुह की दुर्गन्ध सूंघकर,
अपनो से भी ठोकरे तुम्हे मिले!!

अपने पैसो की बर्बादी कर,
क्यु अपने तन को आग लगाते हो!
बिष के समान मदिरा पीकर,
अपने घर मे आतंक मचाते हो!!

पत्नी-बच्चो पर अपना रोब दिखा,
तुम इनके मन मे दहशत फ़ैलाते हो!
नर्क बना डाले तुम घर अपना,
जब शराब पी के तुम आते हो!!

अपने बच्चो का भविष्य बनावो,
और शराब को पिना बंद करो!
पत्नी की खुशिया लौटा के,
परिवार मे रहकर आनंद करो!!

खावो कसम दिल से तुम अपने,
अब शराब को हाथ नही लगाएंगे!
आगे की ज़िंदगी को हम अपने,
हस-मिल के इसे बिताएंगे!!

मोहन श्रीवास्तव
दिनांक-१८/१२/२०००,सोमवार,शाम ७ बजे,
चंद्रपुर(महाराष्ट्र)

गर्व से कहो हम भारतीय हैं

गर्व से कहो हम भारतीय है,
और हम वीरो के ही वंशज हैं !
यह देश हमारा अमर शरीर,
और हम सब इसकी धड़कन हैं !!

इसकी रक्षा करना हमारा प्रथम धर्म,
और जो इससे गद्दारी करे वह दुश्मन है !
यहा तरह-तरह- के विभिन्न धर्म,
जहा सभी धर्मो का संगम है !!

हम बुझदिल या कायर है नही,
जो गीदड़ भभकी से डर जाएं !
हम छुई-मुई के पेड़ नही,
जो छुने से मुर्झा जाएं !!

हम आग उगलते गोले है,
जो दुश्मनों को भष्म कर देते हैं !
हम सब शीतल चंदन है,
जो काल को भी शीतल करते हैं !!

हम सम्मान प्यार देते पहले,
और वैसी ही आशा रखते !
पर इसको समझे डरना कोई,
तो वह आगे से निराशा ही समझे !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१८/१२/२०००,सोमवार,दोपहर,.४५ बजे,
चंद्रपुर(महाराष्ट्र)





तो पति कि जमानत जब्त हो जाती है

शादी-विवाह कि बातें सुनकर,
कुवारों के दिल मे लड्डू फ़ूटते हैं !
आंखों की नीद गायब होकर,
मन मे सुहाने सपने वो बुनते हैं !!

बहुत मान-मनौव्व्ल करने पर,
जब शादी की तारीखें रखी जाती !
शहनाई की गूंज बाजे-गाजे से,
तब बारात दुल्हन के घर मे आती !!

पूरे रश्मों-रिवाज को पुरे कर,
दुल्हन-दुल्हे के घर आती है !
कुछ दिन शांति का राग अलापकर,
फ़िर अशांति के गीत वह गाती है !!

जब नई- नवेली घर आई,
तो अखियां कैसे चार हुए!
पत्नी के घर मे आते ही,
तब दुश्मन अपने घर-द्वार हुए !!

साड़ी- मेकप- बाजार घूमना,
यह उसके लम्बे लिस्ट मे जाता !
विभिन्न तरह के फ़र्माईस से,
फ़िर वो बेचारा पछताता !!

ससुराल-घर पत्नी मे,
उसकी त्रिशंकु कि हालत हो जाती !
यदि पत्नी समझ दार नही मिली,
तो पति की जमानत जब्त हो जाती !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०७/१२/२०००,रात्रि-१२.३५बजे,बॄहस्पतिवार,

चंद्रपुर(महाराष्ट्र)