Saturday, 27 July 2013

बिता अषाढ़ , सावन है आया

बिता अषाढ़,  सावन है आया ।
हरियाली, धरती पर छाया ॥

मेघा बरसे, धीमे व जोर ।
काले बादल, कर रहे शोर ॥

कभी रिम-झिम, रिम-झिम, सी फुहार ।
मन मे जगाये, देखो प्यार ॥

बिरहन के दिल में, उठ रहा पीर ।
मन तो हुआ, जा रहा अधीर ॥

गिरती बूंद, लगता है शोले ।
मोर मस्त, होकर के बोले ॥

जोड़े तो हो रहे, प्रसन्न ।
पर दुःखी हो रहे, हैं बिरहन ॥

सुरज छुपा हुआ, बादल में ।
चाँद न दिखता, देखो गगन में ॥

आकाश धरा के, बीच में बादल ।
धरती का मन, हुआ है पागल ॥

बिता अषाढ़,  सावन है आया ।
हरियाली, धरती पर छाया ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
26-07-2013,friday,10:30pm,
pune,maharashtra.



Tuesday, 23 July 2013

अब तक की ये सबसे रही भ्रष्ट

अब तो चुनाव है, आने वाला,
जिसमें सरकार, नींद से जागेगी ।
तरह-तरह के, घोषणावों की, बारिस कर,
ये हमारे वोटों, को मांगेगी ॥

अब तक की ये, सबसे रही भ्रष्ट,
अपने पापों पे, पर्दा डालेगी ।
कई लुभावने, नारों से,
ये हमारे वोटों, को मांगेगी ॥

महिलावों व बच्चों का, उचित ध्यान,
व किसानों के हित, की बात की जायेगी ।
अल्प संख्यकों के, कई कल्याण के काम,
और हम छात्रों के, हितैषी बतायेगी ॥

पिछड़ी जातियों को, आरक्षण,
और कई उद्योग, लगाये जायेंगे ।
अलगाव वादियों से, होगा बात-चीत,
और सबको रोटी-कपड़ा,मकान दिलाये जायेंगे ॥

रेल,सड़क व, बिजली,पानी,
सबके लिये, सुलभ होंगे ।
कानून-व्यवस्था, होगा चुस्त-दुरुस्त,
व सबके मन, प्रसन्न होंगे ॥

बलात्कारियों को, कड़ी सजा,
व गृहणियों को भी, खुब रिझाया जायेगा ।
भ्रष्टाचार मुक्त, भारत के लिये,
कठोर कदम, उठाया जायेगा ॥

ऐसी घोषणाओं, की बारिस,
मतदान पुर्व, सन्ध्या तक होगी ।
यदि जीत गये तो, इन सब का भार,
मंहगाई से त्रस्त, जनता पर होगी ॥
यदि जीत गये तो, इन सबका भार,
मंहगाई से त्रस्त, जनता पर होगी ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
16-07-2013,10pm,tuesday,
pune,maharashtra.