Saturday, 21 December 2013

मोक्षदायिनी सूर्यपुत्री ताप्ती

(प्रिय सम्माननीय मित्रों,
सादर प्रणाम नमस्ते,

आप सभी को माँ ताप्ती अपनी निर्मल धारा के समान आपके जीवन में भी सदा खुशहाली प्रदान करे...धन्यवाद)

नदियों के देश हमारे भारत में,
कई पुण्य दायिनी नदिया हैं
पर मोक्षदायिनी सूर्यपुत्री ताप्ती,
जिसके शनिदेव जी भइया हैं

अषाढ़ शुक्ल सप्तमी के दिन,
माँ ताप्ती का अवतार हुआ
बेतुल जिले के मूलताई से,
इनका अबिरल प्रबाह हुआ

बारहलींग नामक स्थान,
जो राप्ती नदी के तट पर स्थित है
भगवान श्रीराम जी के द्वारा,
जो त्रेता युग मे प्रतिष्ठित है

सूर्य,ताप्ती,धर्म,पाप,
नारद,शनि,नागाबाबा प्यारा
ये सात कुण्ड जो इसी के तट पर,
जिनका महिमा बहुत ही है न्यारा

जीवन दायिनी छायापुत्री,
और इसके तट के वासी महान है
एम.पी,महाराष्ट्र,गुजरात के भू-भागों को,
जो देती जल की दान है

इसी के तट पर शाण्डिल्य ऋषी की तपोभूमि,
जो शांडिया गांव से जाना जाता
आभोरा,तावा,ताप्ती नदी के मध्य,
यहीं पे श्रवणतीर्थ भी है आता

कपिल मुनि जी का आश्रम,
जहां कपिला गाय का निवास हुआ करता
पारसडोह है जिसका नाम पड़ा,
जो कि ताप्ती के मध्य मे रमा करता


शनिदेव को अपनी बहन को,
एक दिया हुआ वरदान है
वे भाई-बहन अकाल मौत हैं नही मरते,

जो यम चतुर्थी के दिन इसमें करते स्नान हैं

भैंसदेही के पास काशीपुष्कारिणी,
जो चन्द्रपुत्री पूर्णा नदी का उद्गम स्थल है
दूध की नदी भी कहते हैं इन्हें,
जो आगे राप्ती मे ही समाहित है

सूर्यपुत्री माँ ताप्ती का,
हम कर सकते हैं बखान नहीं
इनकी कृपा बस चाहें हम,
बस अपना तो सौभाग्य यही
इनकी कृपा बस चाहें हम,
बस अपना तो सौभाग्य यही....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
21-12-2013,Saturday,03:30PM,(818),

Pune,M.H.





Tuesday, 17 December 2013

आलू सब्जियों का राजा तो मिर्ची सब्जी की रानी

आलू सब्जियों का राजा,
तो मिर्ची सब्जी की रानी ।
गोभी,बैगन की बात ही क्या,
पर टमाटर का ना कोई शानी ॥

पालक,मेथी,चौराई,
और हरा साग सबको भाता ।
चाहे जैसा सब्जी हो,
पर सबका धनिया स्वाद बढ़ाता ॥

मूली,शलजम,गाजर,अदरक,
प्याज व लहसुन किसी से कम है नही ।
चिचिन्धा,परवल,लौकी,तोरई,
पर कटहल,सूरन मे भ्रम हो नही ॥

मशरुम,चुकन्दर व कुनुरु,
शिमला मिर्च भी मन को भाये ।
हरा मटर व चना की सब्जी,
प्यार से सब कोई खाये ॥

सब्जियां होती कई तरह की,
पर बिधि पुर्वक इन्हें बनाया जाए ।
फिर खाने के बाद इन्हे,
पेट पे हाथ फिराया जाए ॥

फिर खाने के बाद इन्हे,
पेट पे हाथ फिराया जाए ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-०२-०६-२०१३,रविवार,
शाम-७ बजे,
पुणे,महाराष्ट्र






Thursday, 12 December 2013

जन तंत्र नही यह भ्रष्ट्र तंत्र है

भ्रष्टाचार कि बगिया देखो,
जो आज बहुत तेजी से फ़ल -फ़ूल रहा है !
बेइमानी की राह पर चल कर,
आदमी अपना ईमान भूल रहा है !!

छोटे अपराध करने वालों को,
सख्त सजाएं दी जाती !
बड़े-बड़े हवाला बाजों को ,
क्लीन चिट है दे दी जाती !!

जन तंत्र नही यह भ्रष्ट्र तंत्र है,
जहां भ्रष्टाचारियों का ही बोल-बाला है !
यहां आम आदमी की आवाजें दबा दी जातीं
हर जगह कोई कोई घोटाला है !!

सत्ता पे अपनी पकड़ बनी रहे,
और सदा वोटों पर मंथन करते रहते !
देश के विकास मे दिलचस्पी कम,
सदा वोटों के विकास मे उलझे रहते !!

पर अब भी अपने सीधे भारत मे,
ईमानदारों की संख्या जादा है !
पर कुछ भ्रष्ट मक्कारों के कारण,
उन्हें हर तरह से सताया जाता है !!
पर कुछ भ्रष्ट मक्कारों के कारण,
उन्हें हर तरह से सताया जाता है ......
मोहन श्रीवास्तव  (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१६//२००० ,मंगलवार,शाम .४० बजे
चंद्रपुर (महाराष्ट्र)