Wednesday, 12 February 2014

किसी के पोस्ट की चोरी नहीं करें

चोर सदा से रहे हैं इस धरा पे,
और आगे भविष्य मे रहेंगे भी ।
अपनी आदत से मजबूर जो मित्रों,
वे तो चोरी करेंगे ही ॥

सोना,चांदी,रुपया,कपड़ा,
या दुनिया मे जितने चीज भी हैं ।
चोरी तो सबकी होती है,
चाहे दिल में बसी कोई प्रीति ही है ॥

किसी के पोस्ट को चोरी करना,
ये बहुत ही घिनौना कार्य है ।
ऐसे बहुत पोस्ट हैं मिल जाते,
जिसके कई प्रमाण हैं ॥

ऐसी ही चोरी मे कविता चोरी,
और लेखन चोरी भी होता है ।
वे तो खुश होते हैं अपने नाम को लिखकर,
पर कवि बेचारा रोता है ॥

बहुत बड़ी मुश्किल से मित्रों,
कोई रचना या लेख लिखे जाते ।
दिल मे बहुत अरमान लिये,
ये किसी भी मंच पे प्रस्तुत किये जाते ॥

मेरा विनम्र निवेदन है उन मित्रों से,
किसी के पोस्ट की चोरी नही करें ।
सत्य तो सदा सत्य ही रहता है,
पर उपर वाले से सदा डरें ॥
सत्य तो सदा सत्य ही रहता है,
पर उपर वाले से सदा डरें....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
12-02-2014,Wednesday,02:00pm,(853)

Pune,M.H.


Tuesday, 11 February 2014

बसंत ऋतु ( बिन सजनी कैसा बसंत )

ये तो बसंत ऋतु का मौसम,
बिरहा के मन मे आग लगाये ।
दिन तो जैसे-तैसे कट जाता,
पर बैरिनि रात सताये ॥

हरे-भरे ये बाग-बगीचे,
और मदमस्त आम की अमराई ।
गेहूं की हरी-हरी बाली,
जिसमें मटर की लता है उलझाई ॥

हरे-हरे ये चने की खेती,
फूली सरसो दिल को भाये ।
पक्षियों की टोली कलरव करती,
और कोयल मधुर गीत मे है गाये ॥

सबको मस्त हुआ देखकर,
महुआ रह-रह के ललचाये ।
चम्पारानी के फूलों की ओर,
गुलाबराज जी अपनी डाल बढ़ाये ॥

जोड़ों का तो मन प्रसन्न है,
सब मन ही मन मुस्कायें ।
पर बिरहा का तो मन उदास है,
ये बसंत ना उसे सुहाये ॥
पर बिरहा का तो मन उदास है,
ये बसंत ना उसे सुहाये.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
10-02-2014,Monday,05:15pm,(749)

Pune,M.H.