Wednesday, 7 January 2015

सपनों के तारे उनके जमीं पे हैं आ गए

सपनों के तारे उनके जमीं पे हैं आ गए,
जिनके सहारे कभी थे वे मुस्कुरा रहे ।
हर हाल मे तो बस उन्हें जीना कुबूल था,
पर आज वो तो कैंसर से देखो हैं लड रहे ॥

पल भर मे उनकी खुशियों को जैसे लग गया नजर,
फूलों से आंख मे ,गम के आंसू जो आ गए ।
कहते थे दुःख के बाद सुख आता है जरुर,
पर आज उनकी जींदगी मे अंधेरे ही छा गए ॥

सब कुछ तो लुट चुका था, लुटने को कुछ न था,
पर आज अपनी जींदगी देखो लुटा रहे ।
कभी पेंसिल से जो लिखे थे,अरमानों का कोई खत,
पर आज अपने हाथों से उसे हैं मिटा रहे ॥

गुलशन में उनकी कलियां आने लगे थे अब,
वो भी अपने मेहनत पे थे इतरा रहे ।
पर सहसा अचानक कोई तूफान आ गया,
वो तो सोच-सोच के बस आसू बहा रहे ॥

तूफान तो आये थे उनके गुलशन मे बहुत से,
पर सह लिये थे वो सब हसते हुए।
मगर ये तूफान आया है जाने किधर से,
पर वो सह रहे हैं सब कुछ सहमे हुए ॥

 सपनों के तारे उनके जमीं पे हैं आ गए,
जिनके सहारे कभी थे वे मुस्कुरा रहे ।
हर हाल मे तो बस उन्हें जीना कुबूल था,
पर आज वो तो कैंसर से देखो हैं लड रहे ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
9009791406 



३१-१२-२०१४. बुद्धवार,
कमला नेहरु कैंसर संस्थान इलाहाबाद(उ. प्र.)

Wednesday, 31 December 2014

मंगलमय हो यह नूतन वर्ष

नया दिन व नये वर्ष का,
आओ दिल से हम स्वागत कर लें ।
बीते वर्ष को अलविदा बोलकर,
आवो नये वर्ष की खुशियां भर लें ॥

यह हम सब का सौभाग्य ही है,
जो हम इस दिन का आनंद ले रहे हैं ।
परम पिता परमेश्वर की कृपा से,
जो हम सब इसमे शामिल हो रहे हैं ॥

सुख-समृद्धि से भरा रहे,
यह भारत वर्ष हमारा ।
नई-नई खुशियां दे हमको,
नया साल यह प्यारा ॥

मंगलमय हो यह नुतन वर्ष,
और सदा घर खुशियों से भरा रहे ।
कभी दुःख ना सताए किसी चीज का,
और धन-बैभव से खजाना भरा रहे ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
09009791406


18-12-2000,monday,5:15pm,,
chandrapur,maharashtra.


Thursday, 13 November 2014

कभी किसी के रंग-रूप पर मत जावो

मत हंसी उड़ावो कभी उनका,
कल इनके अच्छे दिन भी आयेंगे ।
अभी दुःख के आंसू निकल रहे,
कल सुख के बहार भी आयेंगे ॥

काले कोयले की खदान से,
हीरा भी उसी से निकलता है ।
जो कि अंधकार मे उजाला बनकर,
सबको आलोकित करता है ॥

वर्तमान देखकर कभी किसी का,
भूल के मत परिहास करो ।
भविष्य सुनहरा जानकर उसका,
उसे कभी मत निराश करो ॥

सुख-दुःख तो ये लगे रहते,
कल दुःख का बादल छंट जायेगा ।
सुर्यास्त आज हो रहा है तो क्या,
कल नया सवेरा आयेगा ॥

किसी के रंग-रूप पर मत जावो,
उसके गुण का तो सम्मान करो ।
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो ॥
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
21-01-2014,Tuesday,11:30pm,(836)
Pune,M.H
www.kavyapushpanjali.blogspot.in