Thursday, 13 November 2014

कभी किसी के रंग-रूप पर मत जावो

मत हंसी उड़ावो कभी उनका,
कल इनके अच्छे दिन भी आयेंगे ।
अभी दुःख के आंसू निकल रहे,
कल सुख के बहार भी आयेंगे ॥

काले कोयले की खदान से,
हीरा भी उसी से निकलता है ।
जो कि अंधकार मे उजाला बनकर,
सबको आलोकित करता है ॥

वर्तमान देखकर कभी किसी का,
भूल के मत परिहास करो ।
भविष्य सुनहरा जानकर उसका,
उसे कभी मत निराश करो ॥

सुख-दुःख तो ये लगे रहते,
कल दुःख का बादल छंट जायेगा ।
सुर्यास्त आज हो रहा है तो क्या,
कल नया सवेरा आयेगा ॥

किसी के रंग-रूप पर मत जावो,
उसके गुण का तो सम्मान करो ।
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो ॥
कभी किसी का वर्तमान देखकर,
भविष्य़ का मत उपहास करो......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
21-01-2014,Tuesday,11:30pm,(836)
Pune,M.H
www.kavyapushpanjali.blogspot.in






Thursday, 30 October 2014

गजल (होगी जब उनसे मुलाकात मेरी )



होगी जब उनसे  मुलाकात मेरी,
दो दिल खुशियों से तो भर जाएंगे । 
वो जब लेंगे अपनी बाहों में ,
मेरे पलकों को शरम आएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

अब तक जो गम सहे  जुदाई के,
उन्हें हम दोनों भूल जाएंगे   !
होंगी बातें सभी इशारों में ,
वो पल कैसे भी ठहर जाएंगे !!
होगी जब उनसे......

चूड़ियाँ खन -खना रही होंगी ,
कंगन मेरे तो गुनगुनाएंगे ।
धड़कनें मेरी बज रही होंगी ,
दो वदन प्यार में नहाएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

माथे पे बूंदे तो पसीने की ,
वो भी  रह-रह के झिलमिलाएंगे ॥ 
मेरे बिखरे हुए तो लट होंगे ,
हर अदा से उन्हें रिझाएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

पायल पावों में छनकती होंगी ,
झुमके मेरे तो खिलखिलाएंगे !
शांसे दोनों की कह रही होंगी,
हम कभी दूर नहीं जाएंगे  !!
होगी जब उनसे......

रातें  होंगी मेरी दिवाली सी  ,
दिन तो होली का हम मनाएंगे । 
भोर होते ही फूलों की  खुशबू ,
शाम दीपों से जगमगाएंगे ॥ 

होगी जब उनसे  मुलाकात मेरी,
दो दिल खुशियों से तो भर जाएंगे । 
वो जब लेंगे अपनी बाहों में ,
मेरे पलकों को शरम आएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......




मोहन श्रीवास्तव  (कवि )
28-10-2014,08;10 PM,(891)
Tuesday,Baheri,Sidhi (M.P)
Mob-9009791406







Wednesday, 29 October 2014

"घायल सी कर रही ये अदा आपकी"

पीतीं हैं गम को आप हसती हुई,
दर्द होता है तो आप मुस्काती हैं ।
प्यार से कोई दे यदि जहर आपको,
आप हसती हुई उसको पी जाती हैं ॥

आप विश्वाश कर लेती जल्द ही,
लोगों की विष भरी बातें पी जाती हैं ।
आप हैं कि किसी से भी डरती नही,
बातें करने मे  फ़िर आप शर्माती हैं ॥

कन्धों पर भार हो आप के कितना भी,
आप हसती हुई उसको ढो लेती हैं ।
दुख भरे आंसू हों आप की आखों मे,
आप हसती हुई दिल से रो लेती हैं ॥

आप नाराज होती कभी भी नहीं,
आप गुस्से को भी हस के पी जाती हैं ।
आप मायुश होती कभी भी नहीं,
आप मुस्का के औरों मे रह जाती हैं ॥

घायल सी कर रही ये अदा आपकी,
आप अपने भी संग मे तो मुस्काइए !
हो मुस्कुराहट भरी जिन्दगी आप की,
आप ऐसे ही पल-पल तो मुस्काइए !!


पीतीं हैं गम को आप हसती हुई,
दर्द होता है तो आप मुस्काती हैं ।
प्यार से कोई दे यदि जहर आपको,
आप हसती हुई उसको पी जाती हैं ॥


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१९-३-२०१३,मंगलवार, प्रतः ५ बजे,

पुणे, महा.