Monday, 19 February 2024

ना होना कभी निराश

ना होना कभी निराश, मेरे प्यारे दोस्तों
ना खोना सुख की आश, मेरे प्यारे दोस्तों

जींदगी की राह मे, आती हैं मुश्किलें
हमको तो सच्ची राह, बताती हैं मुश्किलें

जब भी कभी दुःख आये तो, होना नही दुःखी
हंसते हुए दुःख सहना, रोना नही कभी

हम करेंगे अच्छे कर्म तो, भगवान साथ हैं
पाप कर्म मे तो, हम दुःख के ही दास हैं

जो भी हुआ है अपना,वो भी था अच्छा
जो हो रहा है और होगा, वो भी तो अच्छा

दुःख-सुख है अपने साथी, इन्हे गले लगाइये
हंसते हुए इन दोनो मे, जीवन बिताइये

ना होना कभी निराश, मेरे प्यारे दोस्तों
ना खोना सुख की आश, मेरे प्यारे दोस्तों

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
रचनांकन दिनांक-०९-०५-२०१३,बृहस्पतिवार,
प्रातः .४५ बजे,

पुणे, महाराष्ट्र

गजल (अपनी किस्मत में तो हम)

अपनी किस्मत में तो हम, आग लगा बैठे हैं
खुदा के सामने सजदा,झुकाए बैठे हैं
अपनी किस्मत में तो हम....

अपने हाथों से तो हम,आशिया जला डाला
अब तो बस याद को,सीने में छुपाये बैठे हैं
अपनी किस्मत में तो हम....

बद्दुआ दिल से किसी ने,दिया है या हमको
अब तो बस आश,दुआ कि लगाये बैठे हैं
अपनी किस्मत में तो हम....

हम तो सपनें में बनाये थे,रेतों का महल
अपने आसूं से तो हम,उसको बहाए बैठे हैं
अपनी किस्मत में तो हम....

हमने तो फूलों का बाग,लगाया था वहां
उनको खिलने से ही पहले, उजाड़ बैठे हैं
अपनी किस्मत में तो हम....

हमने टूटी हुई नाव का,सहारा जो लिया
आज खुद आपको अपने,डुबाए बैठे हैं

अपनी किस्मत में तो हम, आग लगा बैठे हैं
खुदा के सामने सजदा,झुकाए बैठे हैं

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
24-02-2001,saturday,3:00pm,(462),
thoppur,dharmapuri.tamilnadu.


रायपुर दर्शन

छत्तीसगढ़ी गीत
"रायपुर दर्शन"
(ए जी दिल त हमर  घबराथे)

ए जी दिल त हमर घबराथ हे.....2
मोला कउनउ शहर घुमा दे....2
अब ना नोनी के बाबू कछु सोहाथ हे.....
मोला कउनउ जगह घुमा दे.....
ए जी दिल त हमर ......

लोगन से सुने हबे,रायपुर शहर नाम ....2
जहाँ लगथ हे सुघर बजार...2
उहाँ बड़-बड़ बिल्डिंग अउर मॉल हे....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

मालों में मॉल हाबे,सिटी मॉल हे....2
अम्बुजा,मैग्नेटो बड़ा जोरदार हे.....2
उहाँ तरह-तरह के रोजी-रोजगार हे....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

रायपुर रजधानी हमर छत्तीसगढ़ के शान हे..2
हमन छत्तीस गढ़िया हौं बड़ अभिमान हे....2
जहाँ बड़ तेजी से होथ त विकास हे....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

महादेव घाट जाके जल हम चढाबो....2
महामाया मंदिर क दर्शन करबो....2
जहां बंजारी माई क पावन धाम हे.....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

एयर पोर्ट ,स्टेडियम ,एनर्जी पार्क हे.....2
पंडित रवि शंकर विश्वविद्यालय महान हे....2
जहां रायपुर स्टेशन शानदार हे.....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

गुरु घासी दास संग्रहालय भवन में......2
छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मण्डल के आंगन मे..2
जहां साहित्यकारन क जुरथ त समाज हे...
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

रायपुर क टूरा-टूरी बड़ इतराथे......2
दुचक्का पे बइठके भाव बड़ खाथे..2
उमन इंगरेजी में का -का गोठियाथे .....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

नवां- नवां फैशन से बिजुरी गिराथे.....2
दिन में त भीड़-भाड़ ,रात जगमगाथे ....2
जहां सबोजन बस्तर के करथ त सम्मान हे....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

नवां रजधानी-शहर हम घुमबो....2
जलेबी-बालूशाही-गुलाब जामुन हम खाबो....2
जहां मिलथे सबो श्रृंगार हे......
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

जी भर के घुमबो हम रायपुर शहर मा....2
फिर हम लउटबो अपने गांव ला....2
जहां दिल में त मोहन क याद हे.....
मोला ओही जगह घुमा दे .....
ए जी जियरा हमार..

ए जी जियरा हमर घबराथ हे.....2
मोला कउनउ शहर घुमा दे....2
अब ना नोनी के बाबू कछु सोहाथ हे.....
मोला कउनउ जगह घुमा दे.....
ए जी जियरा हमार.......

मोहन श्रीवास्तव (कवि )
14-03-2015,02:30A.M,(927)
Saturday,Mahaveer nagar,Raypur (C.G)

उत्तर प्रदेश दर्शन

आवो हम सब सैर करें,
अपने उत्तर प्रदेश के कुछ गांवो की !
जहां कई सन्त बीर हुए,
ऐसे पुण्य भुमि के छावों की !!

पावन भुमि है उत्तर - प्रदेश का,
जहा तरह-तरह का दर्शन होता है !
भारत का दिल बसता है यहा,
जिससे सारा विश्व प्रभावित होता है !!

प्रदेश की राजधानी यह है लखनऊ,
जो नवाबों का शहर कहलाता है !
कानपुर का चमड़ा और कपड़ा,
जो विदेशों मे नाम कमाता है !!

बनारस के पान का जादू,
और साड़ी का तो जवाब नही !
काशी के महिमा का तो,
 हम कर सकते हैं बखान नही !!

गंगा-यमुना और सरस्वती,
नदियों का अनुपम संगम है !
यह तिर्थ राज प्रयाग ही है,
 जहा मिलती है शान्ति हमे मन मे है !!

कजरी मिर्जापुर का प्रसिद्ध,
यह मां बिन्ध्यवासिनी का दरबार है !
जहा मन चाहा वर मिल जाता ,
इनकी महिमा अपरम्पार है !!

फ़र्रूखाबाद का आलू प्रसिद्ध,
 तो अलिगढ़ के ताले !
आगरा का ताजमहल तो,
बांदा के लाठी वाले !!

पान की खेती हमिरपुर मे,
तो झांसी  की लक्ष्मी बाई !
जिसने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए,
और बीर गती को थी पाई !!

झुमका प्रसिद्ध है बरेली का,
तो आज़मगढ़ के शूट !
दिल वाले गोरखपुर के तो,
रामपुर का खन्जर !!

अफ़ीम उद्योग गाजीपुर मे,
तो कालीन प्रसिद्ध है भदोही का !
कॄष्ण जन्मस्थली मथुरा मे तो,
लड्डू प्रसिद्ध है हरदोई का !!

फ़तेहपुर का बुलन्द दरवाजा,
तो राम लला है अयोध्या मे !
सीतापुर मे नैमिषारण्य तीर्थ,
तो फ़िल्म सिटी है नोएडा मे !!



 
जौनपुर का मूली प्रसिद्ध,
तो क्रान्तिकारी बलिया के !
चकिया का है किला प्रसिद्ध,
तो जी ललचाए देवरिया मे !!

सोनभद्र मे कोयला-बिजली,
तो गणक प्रसिद्ध है मेरठ का !
प्रतापगढ़ मे प्रसिद्ध है चतुराई,
तो सुल्तानपुर मे नाम है अमेठी का !!

छोटे-बड़े और कई है जनपद,
जो एक से बढ़कर एक है !
उत्तर-प्रदेश भारत की धड़कन,
जिसके कई रूप-रंग वेष हैं !!

आवो हम सब सैर करे,
अपने उत्तर-प्रदेश के कुछ स्थानों की !
जहा काई सन्त बीर हुए,
 ऐसे पुण्य भुमि के छावों की !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-२८//२००५,बॄहस्पतिवार,रात्रि १०.४५ बजे,
खरोरा, रायपुर( ..)



गजल (इन खुबसूरत पावों को,जमीं पे न उतारिए)

गजल
(इन खुबसूरत पावों को,जमीं पे न उतारिए)

इन खुबसूरत पावों को,जमीं पे न उतारिए ।
कहीँ लग न जाए घाव,इन्हें मत उतारिए ।।
इन खूबसूरत पावों को..........

यहां पत्थरो के साथ में,कंकड़ व् धूल हैं ।
कही लग न जाए दाग,इन्हें मत उतारिए ।।
इन खूबसूरत पावों को..........

यहां हर तरफ सुलगती,धधकती सी आग है ।
कहीँ जल  न जाए पांव ,इन्हें मत उतारिए ।।
इन खूबसूरत पावों को..........

यहां बर्फ भी बहुत,कड़ाके की सर्द है ।
कहीँ जम न जाए पांव,इन्हें मत उतारिए ।।
इन खूबसूरत पावों को..........

मेहंदी रचे इन पावों को,मेरे दिल में उतारिए ।
कहीँ लग न जाए घाव,इन्हें मत उतारिए ।।

इन खुबसूरत पावों को,जमीं पे न उतारिए ।
कहीँ लग न जाए घाव,इन्हें मत उतारिए ।।

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
14-09-2014, 08:45 P.M, (874),
Bahri,Sidhi(M.P)

छंद:- बसन्त तिलका "सरस्वती वंदना"

छंद:- बसन्त तिलका

 "सरस्वती वंदना"
लाला ललाल ललला, ललला ललाला सरस्वती वंदना 
वागीश्वरी विनय मैं, करता तुम्हारी।
बैठी मराल पर हो, जननी उदारी।।
हे ब्रह्मदेव गृहणी, गुण ज्ञान धारी।
विद्या तथा विनय दो,शुभ लाभ कारी।।१।।

है कंठ में स्फटिक की, शुचि दिव्य माला।।
हो श्वेत वस्त्र पहनी , मुख में उजाला।।
धारे किताब कर में , शुभ कर्ण बाला।
माथा किरीट मणि है, छवि है निराला।।२।।

लेके सितार कर में, विमला बजाती।
पाजेब साज पग में, करुणा लुटाती।।
भौंहें विशाल दृग के, जग को लुभाए।
दाती पुकार सुनके, झट दौड़ आए।।३।।

दो ज्ञान बुद्धि मुझको, विपदा निवारो।
मां लेखनी सफल हो, दुख क्लेश टारो।।
दाती दयालु रहके,भव से उबारो।
हे शांत चित्त मइया, सब पाप जारो।।४।।

है आश मातु तुमपे, बनना सहारा।
कोई नहीं जगत में, यह बेसहारा।।
जानूं न ध्यान करना, लिखना न आता।
ना ज्ञान राग सुर का, लय में न गाता।।५।।

देवी कृपालु रहना, यह है भिखारी।
दो भक्ति शक्ति अपनी, बनके अधारी।।
मैं गीत नित्य रचके, तुमको सुनाऊं।
मां भक्ति भाव हिय में, रख गीत गाऊं।।६।।
मोहन श्रीवास्तव
खुश्बू विहार कालोनी अमलेश्वर दुर्ग छत्तीसगढ़
१७.०२.२०२४, शनिवार, १२.५० दोपहर





Wednesday, 10 January 2024

हे मुरली मनोहर श्याम।

हे मुरली मनोहर श्याम।



हे मुरली मनोहर श्याम।

प्रभु आओ, प्रभु आओ…


मेरे बिगड़े बनाने काम।। 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…. 


मेरी नैया डोल रही है, बीच भँवर में आओ।

एक भरोसा मुझको तुमपर, आकर लाज बचाओ।।

मुझे जग से नहीं है काम…. 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…. 

हे मुरली मनोहर श्याम

मेरे बिगड़े बनाने काम… 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…


मुझको कोई पंथ ना सूझे, तेरा एक सहारा।

ले चल मुझको दूर यहाँ से, अब नहीं यहाँ गुजारा।।

मैं लूँगा तुम्हारा नाम…. 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…

हे मुरली मनोहर श्याम।

प्रभु आओ प्रभु आओ…. 

मेरे बिगड़े बनाने काम… 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…



सब अपराध क्षमा करके , अपना लो गोकुल वाले।

तेरी लीला बहुत सुना हूँ, तुम हो बड़े निराले।।

मुझे ले जाने निज धाम… 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…

हे मुरली मनोहर श्याम।

प्रभु आओ प्रभु आओ…. 

मेरे बिगड़े बनाने काम… 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…



मेरी बुद्धि थोड़ी सी है, हूँ जन्मों का पापी।

पातक के उद्धारक तुम हो, जग में परम प्रतापी।।

मैं दुनिया में बदनाम….. 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…

हे मुरली मनोहर श्याम।

प्रभु आओ प्रभु आओ…. 

मेरे बिगड़े बनाने काम… 

प्रभु आओ, प्रभु आओ…


कवि मोहन श्रीवास्तव

15/04/91


Sunday, 1 October 2023

(शार्दूल विक्रीडित छंद)जय दुर्गे मां "देवी स्तुति"

(शार्दूल विक्रीडित छंद)
जय दुर्गे मां 
"देवी स्तुति"
धारे हाथ दसो गदा धनु अनी, खड्गादि को धार के।
शूली चक्र भूषुण्डि शंख परिघा, माला गले मुंड के।।
सोए माधव क्षीर सागरमहा,ब्रह्मा थके सोच के।
दैत्यों में मधु कैटभादि अति बली,को कोई कैसे हने।।१।।

ध्यायें ब्रह्म प्रार्थना करत हैं,देवी महाकालिका।
मारे जो उस दैत्य को सरल से, देवी महा चंडिका।।
ध्याऊं मैं कमलासनी पर स्थिरा, साक्षात लक्ष्मी महा।
हाथों में जिनके गदा धनुष है,रुद्राक्ष माला तहां।।२।।

घंटा पद्म सुहाय बाण फरसा, देवी धरी शूल है।
धारी है कर कुंडिका कुलिस है,अंभोज आवर्त है।।
गौरी मातु शरीर से प्रकट है,मां शारदा मातु है।
ध्याऊं मैं तुम को प्रणाम करके, नाऊं सदा माथ है।।३।।
कवि मोहन श्रीवास्तव

Wednesday, 6 September 2023

"कलाधर छंद"(श्रीकृष्ण जन्म)अर्ध रात्रि भाद्र मास

"कलाधर छंद"
(श्रीकृष्ण जन्म)
अर्ध रात्रि भाद्र मास कंत देवकी उदास,
नींद नैन में न आय सोच के बिताय है।
देवकी हुई अधीर होत है प्रसूति पीर,
नील कंज ज्योति पुंज सामने लखाय है।।
ज्योति पुंज होय बाल देवकी के गोद लाल,
ईश ने प्रभाव आप रात मे दिखाय है।
नींद आय द्वारपाल बेड़ियां खुली कराल,
रोय बाल जान पास सेन पुत्र आय है।।

देहु देहु मोहि लाल नाहिं मोर पास काल,
हो प्रिया नहीं उदास नंद धाम जान है।
हाथ जोरि बोलि नाथ मोहि ना करो अनाथ,
साँवरा सलोन लाल नाथ मोर प्राण है।।
पुत्र ले चले सुजान सूर्य पुत्रि मे उफान,
चाहती पखार पाँव ब्रम्ह जो महान है।
देखि श्याम प्रीत भाव सूप से निकाल पाँव,
भानुजा पखार पाँव शेष छत्र तान है।।
कवि मोहन श्रीवास्तव 

Monday, 4 September 2023

आदि गुरू शंकराचार्य जी द्वारा रचित "गुरु अष्टकम" का भावानुवाद

आदि गुरू शंकराचार्य जी द्वारा रचित 

"गुरु अष्टकम" का भावानुवाद 

"महाभुजंग प्रयात सवैया"

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भले आपका गात हो रम्य चारू, प्रिया आपकी भी ललामा लगे है।

यशोकीर्ति चारों दिशा में बढ़े या, धनानादिकें मेरु जैसे पगे हैं।

सभी हो प्रिया पुत्र पौत्रादि द्रव्या, स्वसा भ्रातृ या गेह सारे सगे हैं।

हिया में न आचार्य के पांव पूजेँ , सभी व्यर्थ जानो सभी व्यर्थ जानो।।1।।


सभी वेद वेदांग जिह्वाग्र पे हों, रचें श्रेष्ठ काव्यादि गद्यादि को हैं।

मिले देश देशांतरों में प्रतिष्ठा ,चलें  वें  सदाचार के मार्ग पे हैं।।

यशोगान होता रहे नित्य चाहे, करें मान सम्राट आ व्यक्ति द्वारे।

हिया में न आचार्य के पांव पूजेँ , सभी व्यर्थ जानो सभी व्यर्थ जानो।।2।।


भलाई तथा दान जो भी करूं मैं, यशोकीर्ति हो व्याप्त चारों दिशाएं ।

सभी वस्तुएं लोक की जो गुणी हैं, सदा हाथ मेरे सभी वो सुहाएं।।

प्रिया हो ललामा धनानादि या हो, सभी वस्तुओं से हटे ध्यान मेरा।

हिया में न आचार्य के पांव पूजेँ , सभी व्यर्थ जानो सभी व्यर्थ जानो।।3।।


सभी ध्यान पूजा मिले सिद्धि सारे , विरागी बनूं मैं नहीं ये लुभाएं।

तजूं मोह शाला अरण्यादि का मैं, परे मैं रहूं दूर ना ये रिझाएं।।

स्वतः कामना नष्ट सारे हमारे, सभी व्यर्थ हैं ये बिना ये गुरू के।

हिया में न आचार्य के पांव पूजेँ , सभी व्यर्थ जानो सभी व्यर्थ जानो।।4।।

कवि मोहन श्रीवास्तव

दरबार मोखली, पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़

14.04.2023


Sunday, 3 September 2023

छन्द : "चामर""है स्वतंत्र तंत्र और पुष्ट देश हो रहा"

छन्द : "चामर"

"है स्वतंत्र तंत्र और पुष्ट देश हो रहा"

रोम रोम में रहे सदा स्वदेश भावना।
राष्ट्रवाद से बड़ा विशेष हो न कामना।।

विश्व के गुरू बनें यही सदैव चाह हो।
देश हेतु वक्ष में सदा भरे उछाह हो।।

देश के सुता सपूत नित्य शोध को करें।
ज्ञान ध्यान से उड़ान अंतरिक्ष में भरें।।

व्योम सिन्धु भूमिलोक वा पहाड़ नापते।
हिन्द के जवान देख शत्रु झुण्ड कांपते।।

अंतरिक्ष रेल पोत वायुयान में बढ़ें।
एवरेस्ट कूट पे अनेक साहसी चढ़ें।।

वर्तमान हिन्द नित्य श्रेष्ठ मान पा रहा।
विश्व आज भारती पुराण वेद गा रहा।।

बेटियां चला रहीं सभी विमान यान हैं।
वेद शिल्प योग ज्ञान में सदैव ध्यान है।।

खेल कूद राजनीति अर्थ धर्म रीति में।
योगदान दे रहीं विदेश देश नीति में।।

नारि शक्ति राष्ट्र भक्ति में सदा लगी हुई।
सैन्य की कमान थाम अस्त्र से सजी हुई।।

भूमिपुत्र खेत में करें नए प्रयोग हैं।
नित्य यन्त्र से अगाध्य शस्य लेत लोग हैं।।

योजना किसान हेतु भांति भांति के बने।
लाभ लें अपार मोद में रहें बने ठने।।

और योजना अनेक लोक लाभ के लिए।
उच्च स्वास्थ लाभ प्राप्ति से सभी सुखी जिएं।।

अन्न लाभ देश के सुपात्र लोग पा रहे।
द्रव्यलाभ से नवीन रोजगार आ रहे।।

नीर गैस दामिनी सदैव लब्ध आज है।
राष्ट्र भक्ति में प्रवृत्त हो रहा समाज है।।

ज्ञान केंद्र में अनेक शोध नित्य हो रहे।
जाति पात ऊंच नीच पंथ भेद खो रहे।।

जो निवासहीन थे मिले उन्हें निवास हैं।
राष्ट्र के विकास के लिए सभी प्रयास हैं।।

यान उच्च कोटि और श्रेष्ठ मार्ग हैं बने।
भारतीय विश्व में गर्व से खड़े तने।।

भिन्न भिन्न यान आज अंतरिक्ष मे उड़े।
भौम चंद्र सूर्य भेज शुक्र यान भी खड़े।।

शासकीय तन्त्र से अनेक काम हो रहे।
देश के ललाट के कलंक और धो रहे।।

चीन क्षीण हीन और पाक दीन रो रहा।
है स्वतंत्र तंत्र और पुष्ट देश हो रहा।।

ध्वस्त बाबरी हुआ अभीष्ट काम हो गए।
दिव्य भव्य धाम में प्रविष्ट राम हो गए।।

ज्ञानवापि काशिनाथ मार्ग भी प्रशस्त है।
कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति हेतु भक्त व्यस्त हैं।।

विश्व आज श्रेष्ठ राम नाम गीत गा रहा।
कृपालु राम चन्द्र का सनेह नित्य पा रहा।।

कवि मोहन श्रीवास्तव