Thursday, 30 October 2014

गजल (होगी जब उनसे मुलाकात मेरी )



होगी जब उनसे  मुलाकात मेरी,
दो दिल खुशियों से तो भर जाएंगे । 
वो जब लेंगे अपनी बाहों में ,
मेरे पलकों को शरम आएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

अब तक जो गम सहे  जुदाई के,
उन्हें हम दोनों भूल जाएंगे   !
होंगी बातें सभी इशारों में ,
वो पल कैसे भी ठहर जाएंगे !!
होगी जब उनसे......

चूड़ियाँ खन -खना रही होंगी ,
कंगन मेरे तो गुनगुनाएंगे ।
धड़कनें मेरी बज रही होंगी ,
दो वदन प्यार में नहाएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

माथे पे बूंदे तो पसीने की ,
वो भी  रह-रह के झिलमिलाएंगे ॥ 
मेरे बिखरे हुए तो लट होंगे ,
हर अदा से उन्हें रिझाएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......

पायल पावों में छनकती होंगी ,
झुमके मेरे तो खिलखिलाएंगे !
शांसे दोनों की कह रही होंगी,
हम कभी दूर नहीं जाएंगे  !!
होगी जब उनसे......

रातें  होंगी मेरी दिवाली सी  ,
दिन तो होली का हम मनाएंगे । 
भोर होते ही फूलों की  खुशबू ,
शाम दीपों से जगमगाएंगे ॥ 

होगी जब उनसे  मुलाकात मेरी,
दो दिल खुशियों से तो भर जाएंगे । 
वो जब लेंगे अपनी बाहों में ,
मेरे पलकों को शरम आएंगे ॥ 
होगी जब उनसे......




मोहन श्रीवास्तव  (कवि )
28-10-2014,08;10 PM,(891)
Tuesday,Baheri,Sidhi (M.P)
Mob-9009791406







Wednesday, 29 October 2014

"घायल सी कर रही ये अदा आपकी"

पीतीं हैं गम को आप हसती हुई,
दर्द होता है तो आप मुस्काती हैं ।
प्यार से कोई दे यदि जहर आपको,
आप हसती हुई उसको पी जाती हैं ॥

आप विश्वाश कर लेती जल्द ही,
लोगों की विष भरी बातें पी जाती हैं ।
आप हैं कि किसी से भी डरती नही,
बातें करने मे  फ़िर आप शर्माती हैं ॥

कन्धों पर भार हो आप के कितना भी,
आप हसती हुई उसको ढो लेती हैं ।
दुख भरे आंसू हों आप की आखों मे,
आप हसती हुई दिल से रो लेती हैं ॥

आप नाराज होती कभी भी नहीं,
आप गुस्से को भी हस के पी जाती हैं ।
आप मायुश होती कभी भी नहीं,
आप मुस्का के औरों मे रह जाती हैं ॥

घायल सी कर रही ये अदा आपकी,
आप अपने भी संग मे तो मुस्काइए !
हो मुस्कुराहट भरी जिन्दगी आप की,
आप ऐसे ही पल-पल तो मुस्काइए !!


पीतीं हैं गम को आप हसती हुई,
दर्द होता है तो आप मुस्काती हैं ।
प्यार से कोई दे यदि जहर आपको,
आप हसती हुई उसको पी जाती हैं ॥


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१९-३-२०१३,मंगलवार, प्रतः ५ बजे,

पुणे, महा. 


Wednesday, 17 September 2014

आएंगे अच्छे दिन अपने ?


बढ़  रहे  दाम  है  तेजी  से,
लोगों  का  हाल   बेहाल  हुआ  ।
आएंगे अच्छे  दिन  अपने  ?
हर ,दिल   में  आज  सवाल  उठा  ॥


भारत  का  नाम  बढ़ रहा है  आज ,
इसमे  कोई  संदेह  नहीं  ।
 पर महंगाई  रोकने  में अब  तक,
मोदी  सरकार  है  बिफल  रही  ॥

सरकारी  कामो  में  पारदर्शिता ,
इससे  जनमानस   में  बहुत  ख़ुशी 
 पर  रोटी -कपड़ा -मकान   के  लिए ,
आज  आम  आदमी  सभी  दुखी  ॥

नहीं चाहिए  सोना -चांदी ,
ना  ही महल  व  गाड़ी  ।
 रोटी -कपड़ा  व  सस्ते घर  हों ,
यही है मांग  हमारी  ॥ 

पर  आज  जिस  तरह  से  बढ़  रहे  हैं  दाम ,
ये  किसी  भी  तरह  से  ठीक  नहीं  । 
आएंगे  अच्छे  दिन  अपने  ?
 यह  हास्य  से बढ़कर  कुछ  भी  है  नहीं  ॥
 आएंगे  अच्छे  दिन  अपने  ? 
यह  हास्य  से बढ़कर  कुछ  भी  है  नहीं>>>>>

मोहन  श्रीवास्तव  (कवि )

13-09-2014,saturday, 06: 30  pm,Bahri,Sidhi (M.P)    

Thursday, 4 September 2014

शिक्षक दिवस पर आप सभी को

गुरू  सदा  से  रहें  हैं  इस धरा  पे ,
और  आगे  भविष्य  में  रहेंगे  भी  । 
उन सब  के  आशीर्वाद से ही ,
 हम  सब  फूल  व फल रहे  सभी  ॥ 


बिना  गुरु  के ज्ञान  नहीं ,
ये वाक्य  भी  शत -प्रतिशत  है सही  । 
गुरु  हैं  मिलते  कई  रूप  में ,
मात -पिता  या  शिक्षक  हो कोई  ॥ 

 जिनसे  हम कुछ  सीख है  पाते ,
उन्हेँ    गुरु ही  हम  जाने । 
गुरु  से कभी  कपट  नहीं  करना, 
उन्हें  भगवान  से भी बढकर  माने ॥ 

कभी  गुरु का दिल न दुखाऐं ,
ना ही  कभी अपमान करें  । 
शुद्ध  ह्रदय  से सदा ही उनको ,
झुक  कर सदा प्रणाम  करें ॥ 

शिक्षक  दिवस पर  आप   सभी   को ,
बहुत -बहुत है बधाई  । 
सभी गुरुओं  को मेरा  शत -शत है नमन ,
जो हम सब की करते भलाई ॥ 
सभी गुरुओं  को मेरा  शत -शत है नमन ,
जो हम सब की करते भलाई …… 

मोहन  श्रीवास्तव (कवि )
04-09-2014, Thursday,Bahri,Sidhi (M.P)
(869) 03.00 PM
9009791406



Thursday, 24 July 2014

पापी पेट ( यह कैसा पापी पेट )


यह कैसा पापी पेट
राजा-रंक या हो सेठ

इसका भूख कभी नही मिटता
दिन-रात भूख से ये है सिसकता

कभी यह प्यास से है व्याकुल
कभी यह भूख से है आकुल

कभी इसे दौलत की भूख
कभी इसे औरत की भूख

देखो ए कैसा स्वारथी
क्षण भर के लिए बने परमारथी

उचित-अनुचित का इसे नही विचार
सुख के लिए तजे यह सदाचार

इससे परेशान सारा संसार
ए सभी दुखों का सार

मै भी इससे ऊबा हूं
इसकी माया मे डूबा हूं

हाय-हाय है चारों ओर
यह खुश होता सुन के शोर

ऐसे मे ए अपनी शान समझता
बहुतों की ये खाल नोचता

इस पापी के अनेकों रूप
जाड़ा-गर्मी-सर्दी-धूप

माता-पिता-भाई-बहन
इसके लिए सभी जैसे ग्रहण

देखो यह कैसे है खड़ा
इसके लिए होता नित झगड़ा

यह सब सुखों की आशा है
भाई-भाई-खून का प्यासा है

इसके लिये छोड़ गांव देश
हरा-भरा सुन्दर प्रदेश

जाते है सब दूर देश
सहते ईर्ष्या-राग द्वेश

कभी-कभी ऐसा हो जाता
इसका भूख सहा नही जाता

यह कथनी कितनी सही है
पेट नही तो भेट नही है

इसकी कैसी नीच हरकतें
भूख से कई व्याकुल हो मरते

आज इससे सभी दुखी
इससे कोई नही सुखी

इससे सभी हुए नर्वश
इस पर चलता नही किसी का बस

हाय यह कैसा पापी पेट
जलचर-थलचर या नभचर शेष
हाय यह कैसा पापी पेट .......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१२/०४/१९९१,

एन.टी.पी.सी दादरी ,गाजियाबाद(उ.प्र.)