सब छूट गया दिल टूट गया ।
सब छूट गया..........
सपने तो सजाये हुए थे हम ।
मेरा प्यार तो कोई लूट गया ।।
सब छूट गया.........
हम देख रहे कुछ कह ना सके ।
ऐसा क्यों हुआ सब पूछ रहा ।।
सब छूट गया.........
हमको न पता न ही मुझको खबर ।
वो जो वादे किये वो झूठ रहा ।।
सब छूट गया.........
बेवफा हम न थे हम वफ़ा पे तो थे ।
मेरे साथ तो आज है धोखा हुआ ।।
सब छूट गया.........
मैंने फूल बिछाए थे उनके लिए ।
वो तो कांटो का हार है खूब दिया ।।
सब छूट गया दिल टूट गया ।
मेरा प्यार तो आज है रूठ गया ।।
सब छूट गया..........
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
21-03-2014,friday.09:00PM.(863),
In pune-bilaspur express train
Near Ahmed Nagar M.H

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