हर पल आप ऐसे ही ,यूं मुस्कुराइए ,
जिंदगी के गीत को ,यूं गुन-गुनाईए ।
काटों मे भी फूल ,बनकर रहा करें ,
खुश्बू से इस जहां को ,तो महाकाईए ।।
खुश रहें आप ऐसे ,हमेशा ही मेरे दोस्त,
फूलों की तरह आप सदा ,खिल-खिलखिलाइए ।
दु:ख की काली रात ,कभी आये साथिया,
तो तारे बनकर गगन मे,यूं झील-मिलाइए ।।
आती है नेक काम में ,सदा ही मुश्किलें,
साहस के साथ आगे कदम, बढ़ाते ही जाइये ।।
नफरत की कहीँ किताब हो,तो उसको छोड़कर,
ढाई अच्छर प्रेम का,पढ़ाते ही जाइये ।।
पतझड़ की तरह जिंदगी भी,होती है मेरे दोस्त,
पर आता बसन्त जरूर है,ये दिल को समझाइये ।
थोड़ी सी मुस्कुराहट को,हमको भी दीजिये ,
आप ऐसे पल -पल मुस्कुराइए ।।
हर पल आप ऐसे ही ,यूं मुस्कुराइए ,
जिंदगी के गीत को ,यूं गुन-गुनाईए ।
काटों मे भी फूल ,बनकर रहा करें ,
खुश्बू से इस जहां को ,तो महाकाईए ।।
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
12-09-2014, 07:00P.M,(872),
चित्र ; गूगल से साभार लिया गया
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