छत्तीसगढ़ी गीत
(महंगाई)
"सखी महंगाई में आगी लगे जाथे"
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी सोचि-सोचि के कपार फटे जाथे....
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
या कपड़ा अउर चाउर....
या हो भाजी या हो तेल ..2
या हो डीजल -पेट्रोल ...
चाहे माटी क तेल......2
सखि अंगरा में भी आग लगी जाथे....2
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
कइसे लइकन हो पढाई...
इनकर एतना ना कमाई ...2
कइसे लेबो कापी-पुस्तक.....
भरबो कइसे कालेज फीस....2
मोर लइकन के जिनगी अंधियार हे .....2
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
जब आवथे कउनउ त्यौहार .....
सोचि के दुःख थे कपार......2
कइसे बनाबो हम पकवान .....
घर में कउनउ ना समान .....2
सखि सोचि-सोचि के आंख भर जाथे...2
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
घर में हो जाथे जब कउनउ बीमार .....
हमन हो जाथौं लाचार......2
सरकारी अस्पतालन क बस नाम ......
पराइवेट में लगथे बड़ दाम.....2
दवा-दूध-फल में भी आगी लगे जाथे.....2
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
नोनी होथे सयानी.....
चिंता हमन के बड़ भारी...2
मगथे ऊमन बड़ दहेज.....
बनके जइसे कउनउ व्यापारी ....2
अब त आश बस हमन के भगवान हे......2
बिजली-पानी या हो गेस ........
महंगाई से सब मे कलेश.....2
मोला कहथ लगे लाज.....
हमन के अइसन समाज .......2
कइसे-कइसे हमन जिनगी बिताथन....2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी सोचि-सोचि के कपार फटे जाथे....
मोला कुछुअउ सोहाथे ना......2
सखी महंगाई में आगी लगे जाथे....2
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
23-03-2015, Monday,(929),04:00A.M,
Mahaveer Nagar Raipur (C.G).
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