चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों,
जींदगी का कोई हमसफर चाहिये ।
प्यार से दोनों तो मिल रहे हों गले,
इक-दूजे की नजर से नजर चाहिये ॥
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....
दूर कोई नहीं बस दो प्रेमी हों,
और कोई नहीं तीसरा चाहिये ।
चाँदनी चाँद के तो छाया तले,
इश्क और हुश्न प्यारा सा चाहिये ॥
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....
आखों को बंद किये बातें हो कर रहे,
हार बाहों का गले में पहनाना चाहिये ।
जीस्म दो हों मगर जान तो एक हो,
उस पल गम तो सभी को भुलाना चाहिये ॥
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....
नफरत को छोड़कर प्यार ही प्यार हो,
हर खुशी इस जहां का लुटाना चाहिये ।
अश्रु खुशियों का झर रहे आंख से,
मन ही मन दोनों को मुस्कराना चहिये ॥
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....
रेशमी जुल्फों के साए में दो हैं दिल,
गीत खुशियों के तो गुनगुनाना चहिये ।
आज की ही तरह रोज हर रात हो,
दुआ मेरी भी दिल मे बसाना चाहिये ॥
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों,
जींदगी का कोई हमसफर चाहिये ।
प्यार से दोनों तो मिल रहे हों गले,
इक-दूजे की नजर से नजर चाहिये ॥
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
18-02-2014,Tuesday,03:40am,(858)
Pune,M.H.
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