Monday, 19 February 2024

गजल (चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों )

चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों,
जींदगी का कोई हमसफर चाहिये
प्यार से दोनों तो मिल रहे हों गले,
इक-दूजे की नजर से नजर चाहिये
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....

दूर कोई नहीं बस दो प्रेमी हों,
और कोई नहीं तीसरा चाहिये
चाँदनी चाँद के तो छाया तले,
इश्क और हुश्न प्यारा सा चाहिये
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....

आखों को बंद किये बातें हो कर रहे,
हार बाहों का गले में पहनाना चाहिये
जीस्म दो हों मगर जान तो एक हो,
उस पल गम तो सभी को भुलाना चाहिये
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....

नफरत को छोड़कर प्यार ही प्यार हो,
हर खुशी इस जहां का लुटाना चाहिये
अश्रु खुशियों का झर रहे आंख से,
मन ही मन दोनों को मुस्कराना चहिये
चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों.....

रेशमी जुल्फों के साए में दो हैं दिल,
गीत खुशियों के तो गुनगुनाना चहिये
आज की ही तरह रोज हर रात हो,
दुआ मेरी भी दिल मे बसाना चाहिये

चाँदनी रात मे तो मेरे दोस्तों,
जींदगी का कोई हमसफर चाहिये
प्यार से दोनों तो मिल रहे हों गले,
इक-दूजे की नजर से नजर चाहिये

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
18-02-2014,Tuesday,03:40am,(858)

Pune,M.H.




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