Monday, 19 February 2024

वेलेन्टाइन डे (याद आता है मुझे वो वेलेन्टाइन डे का बेलन)


याद आता है मुझे वो वेलेन्टाइन डे का बेलन,
जब मैं सब कुछ छोड़ के भागा था
बेलन मेरे पीछे-पीछे,
और मै तो आगे-आगे था

एक बार की बात है मित्रों,
उस दिन वेलेन्टाइन डे ही था
एक रुपसी युवती ने ,
मुझे बहुत ही प्रपोज किया

मैं भी उसकी बातों मे आकर,
सोचा मै भी थोड़ा दिल अपना भी बहला लूं
वेलेन्टाइन डे पर कुछ मै भी,
उससे प्यार की बातें कर लूं

बात जब पक्की हुई हमारी,
हम दोनों प्यार से थोड़ी दूर गये
वो मदमस्त बहारों का था मौसम,
जहां झील के पास हम बैठे थे

प्यार भरी बातें उसने की,
अपने बीते इतिहास की
मैने भी अपना कहानी किया बया,
और हुआ हास-परिहास भी

जब ये बात पता चली मेरी गृहमंत्री जी को,
तब वे बेलन लेके दौड़ पड़ी
दुर्गा से काली बनकर के,
मेरे ऊपर वे टूट पड़ीं

फिर क्या कहूं अपनी कहानी मित्रों,
मुझ पर बेलन पर बेलन पड़ते जाते थे
मैं जान बचा के भाग रहा,
पर वे प्रहार को करते जाते थे

उस दिन के बेलन से पड़ी मार को,
मैं आज तक भूल नहीं पाया हूं
जब-जब वेलन्टाइन डे आता मित्रों,
तब-तब मैं मुर्झा जाता हूं
जब-जब वेलन्टाइन डे आता मित्रों,
तब-तब मैं मुर्झा जाता हूं......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
15-02-2014,Sunday,12:30pm,(856)

Pune,M.H.



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