दुनिया मे हर जीव को मान चाहिये ।
इंसान से इंसान को सम्मान चाहिये ॥
या हो अमीर या गरीब या भिखारी हो ।
एक-दुसरे से सबको सम्मान चाहिये ॥
बच्चा,युवा,बूढ़ा,अपाहिज हो साथियों ।
कन्या,बेटी,बहन या औरत हो साथियों ॥
पत्नी,पति,भाई,बहन,रिश्तेदार साथियों ।
हर एक को इंसान से सम्मान चाहिये ॥
रिक्शा चलाने वाला या कोई झोपड़ी मे हो ।
शहर,गांव या कोई डोंगरी मे हो ॥
या हो खिलाड़ी खेल का,या कोई मदारी हो ।
सबको सबसे प्यार से सम्मान चाहिये ॥
बिधवा,बेसहारा,मजदूर कोई हो ।
अनपढ़,गंवार,पागल या मजबूर कोई हो ।
या हो अछूत या तो लाचार कोई हो ।
चाहे जैसे हों इन्हें सम्मान चाहिये ॥
छोटे धंधे वाले या किसान कोई हो ।
चाहे जीव का देखो पहचान जो भी हो ॥
सबको जीने रहने का अधिकार चाहिये ।
इंसान को इंसान से सम्मान चाहिये ॥
दुनिया मे हर जीव को मान चाहिये ।
इंसान से इंसान को सम्मान चाहिये ॥
या हो अमीर या गरीब या भिखारी हो ।
एक-दुसरे से सबको सम्मान चाहिये ॥
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
28-01-2014,Tuesday,02:00pm,(844)
Pune,M.H.
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