Monday, 19 February 2024

घूंघट (घूंघट दिल की धड़कन है)

नारियों का शान होता है घूंघट,
जो सबको दिवाना बनाता है
जब तक दिखता नहीं मुखड़ा,
तब तक कल्पना बहुत ही कराता है

मुखड़ा तो चाँद जैसा होगा,
आखें होंगी मृगनयनी से
होठों का रंग गुलाबी सा,
भौहें तो होंगी नुकिली से

कानों में लटकते होंगे झुमके,
सिर पे बेंदी तो होगा
नाक मे पहनी होगी नथिया,
और माथ पे बिन्दी तो होगा

जब तक उसे वो देख ले,
दिल में कई सवाल तो आता हैं
घूंघट होता है ऐसा ही,
जो सभी दिलों को भाता हैं

स्त्री का लाज होता है घूंघट,
इसे मिलता है सम्मान बहुत
घूंघट तो दिल की धड़कन है,
जिसे अपने पर है अभिमान बहुत
घूंघट तो दिल की धड़कन है,
जिसे अपने पर है अभिमान बहुत....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
24-01-2014.Friday,05:00pm,(839)

Pune,M.H

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