अश्लील इशारे,नयना कजरारे,
वो रह-रह के पास बुलायें ।
कभी किस-किस को पुकारें,तु आ जा रे,
वो कैसी तो बलखायें ॥
कैसी-कैसी गली है,वो कैसे पली है,
वो सबके दिल बहलायें ।
कोई मुजरा व डांस,कोई रचती हैं रास,
वो मनचलों के दिल बहलायें ॥
उनके भी अरमान,वो भी चाहे हैं मान,
पर दुनिया बेदर्दी बड़ी है ।
उनसे रहते सब दूर,जैसे कोई अछूत,
क्योंकि वो तो बदनाम गली है ॥
उनके दिल हैं साफ,पर कोई ना साथ,
क्योंकि वो तो तवायफ की गली है ।
उनकी भी चाह,मेरी अच्छी हो राह,
वो भी बड़े नाजो से पली हैं ॥
कुछ तो जरूर,जब वे होती हैं मजबूर,
जब इस काम को वे अपनायें ।
कुछ तो सिधी-सादी,जब वे चंगुल मे फंस जाती,
जो इस दल-दल से कभी निकल ना पायें ॥
अश्लील इशारे,नयना कजरारे,
वो रह-रह के पास बुलायें ।
कभी किस-किस को पुकारें,तू आ जा रे,
वो कैसी तो बलखायें ॥
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
30-01-2014,Thursday,03:30pm,(846)
Pune,M.H.
.jpg)
.jpg)
.jpg)
No comments:
Post a Comment