Monday, 19 February 2024

बदनाम गली (जब कोई अबला या गुड़िया)

सारे राह बंद हो जाते हैं,
कहीं आशा की किरण नजर नही आती
जब कोई अबला या गुड़िया,
उन बदनाम गली की जाल में फंस जाती

कई ऐसी मासूम हैं जो,
उन दलालों की मिठी बोली मे हैं जाती
जिनके अंदर दया नही,
ऐसे जानवरों के चंगुल मे हैं फंस जाती

रो-रोके होगा बुरा हाल,
और उनपे अत्याचार ढहाया जाता होगा
जबरन उनकी आबरू को,
उस बाजार मे लुटाया जाता होगा

वो जिस्म का दलदल ऐसा है,
जहां से वापस आना बहुत ही मुश्किल होगा
जब एक बार कोई फस जाती है,
तो उसका आबरू बचाना मुश्किल होगा

कई तरह से प्रताड़ना करते होंगे,
जिसमे भुखे रहना भी शामिल होगा
ऐसे लोगों का दिल सच में,
बहुत क्रूर जालिम होगा

किसी अबला या बेटी को,
उस दलदल मे कोई ना पहुचावो।
अपनी बेटी,बहन ही जैसे,
उन सबकी भी लाज बचावो
अपनी बेटी,बहन ही जैसे,
उन सबकी भी लाज बचावो.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
30-01-2014,Thursday,11:20pm,(847)
Pune,M.H.
www.kavyapushpanjali.blogspot.in








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