सारे राह बंद हो जाते हैं,
कहीं आशा की किरण नजर नही आती ।
जब कोई अबला या गुड़िया,
उन बदनाम गली की जाल में फंस जाती ॥
कई ऐसी मासूम हैं जो,
उन दलालों की मिठी बोली मे हैं आ जाती ।
जिनके अंदर दया नही,
ऐसे जानवरों के चंगुल मे हैं फंस जाती ॥
रो-रोके होगा बुरा हाल,
और उनपे अत्याचार ढहाया जाता होगा ।
जबरन उनकी आबरू को,
उस बाजार मे लुटाया जाता होगा ॥
वो जिस्म का दलदल ऐसा है,
जहां से वापस आना बहुत ही मुश्किल होगा ।
जब एक बार कोई फस जाती है,
तो उसका आबरू बचाना मुश्किल होगा ॥
कई तरह से प्रताड़ना करते होंगे,
जिसमे भुखे रहना भी शामिल होगा ।
ऐसे लोगों का दिल सच में,
बहुत क्रूर व जालिम होगा ॥
किसी अबला या बेटी को,
उस दलदल मे कोई ना पहुचावो।
अपनी बेटी,बहन ही जैसे,
उन सबकी भी लाज बचावो ॥
अपनी बेटी,बहन ही जैसे,
उन सबकी भी लाज बचावो.....
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
30-01-2014,Thursday,11:20pm,(847)
Pune,M.H.
www.kavyapushpanjali.blogspot.in

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