इक नई नवेली नारि, करके श्रृंगार ,
फूलों की तरह है मुस्काती ।
तन पे बहार , दिल बेकरार ,
नागिन की तरह है बलखाती ।।
इक नई नवेली नारि ...........
होके तैयार , करे ईंतजार,
पिया मिलन की चाह है उसकी ।
वो बार -बार झांके है द्वार ,
उसे चैन नहीं है मिलती ।।
फूलों का हार , मदमस्त चाल ,
वो रह - रह के इतराती ।
वो करती पुकार , मन में हजार ,
और गीत मिलन के है गाती ।।
उसके होठ है लाल , गुलाबी सी गाल ,
आंखे कजरारी प्यारी ।
लहराते बाल , वो तो सवाल ,
हर अदा लगे है न्यारी ।।
वो करती है ध्यान ,सुन्दर परिधान ,
वो तो साजन की है सहेली ।
पिया मिलन की आश ,दिल में है प्यास ,
वो मनमोहक नारि अलबेली ।।
मोहन श्रीवास्तव (कवि)
23-03-2014, 11.50 AM, Sunday,
Mahaveer Nagar Raipur,(C.G)
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