Tuesday, 7 April 2015

कानून आज है बस गरीबों के लिये

कानून आज है बस गरीबों के लिये,
पैसे वालों के लिए कानून नही ।
निर्दोषों को फसाना आम बात,
अपराधियों को सजा,मिलती ही नही ॥

लाचार और मजबूरों को,
हर तरह से सताया जाता है ।
अबलावों व कमजोरों पर,
अपने बल को दिखाया जाता है ॥

हर आखों में दहशत भरा हुआ,
सहमें-सहमें से लोग यहां ।
पैसों की लालच में देखो,
ईंषान इमान है बेच रहा ॥

नौकरियां उन्हें ही है मिलती,
जो नोटों से भरे थैले देते ।
बेटियां उन्हें ही ब्याही जातीं,
जहां नम्बर दो के पैसे रहते ॥

ईनाम-पुरष्कार उन्हें ही मिलते,
जिनका  पहुंच अधिक होता  ।
वुद्धिमान वही हैं कहलाते,
जिनका  परधन से बनी कोठी रहता 
 ॥

कानून आज है बस गरीबों के लिये,
पैसे वालों के लिए कानून नही ।
निर्दोषों को फसाना आम बात,
अपराधियों को सजा,मिलती ही नही ॥

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
24-08-2001,friday,11:00am,(503),

In varanasi-kochin expss train,
चित्र ; गूगल से सादर लिया गया। 

Monday, 23 March 2015

माँ अम्बा देवी (धारुड़,बेतुल,मध्य प्रदेश)


आओ हम अम्बा देवी माँ का,सुमिरन कर लें ।
अदि शक्ति शेरांवाली का तो हम,भजन कर लें ।।
माँ की प्यारी भक्त राधा का,
उनके चरणों मे हम नमन कर लें ।।
आओ हम अम्बा देवी माँ का......

बेतुल जिले की धारुड़ के पास गुफाओं में,
माँ अम्बा देवी वहीँ पे बिराजी हैं ।
मुम्बई की अम्बा देवी,अमरावती की अम्बा माँ ,
ये उनके ही रूप में जानी जाती है ।।

माई मंगला का समाधि स्थल धारुड़ में,
जिन्हें सब कोई माँ राधा कह बुलाते थे ।
माँ राधा के गुरु सूरदास स्वामी थे,
जो परत वाड़ा के ही रहने वाले थे ।।

साल बर्डी शिवधाम की गुफा में माँ,
शिव और अम्बा माँ का आराधना था है किया ।
कुछ दिन बाद वहाँ के पुजारी से आहत,
माँ राधा ने वहाँ से तो था प्रस्थान किया ।।

मा शिवधाम को तब छोड़कर आगे थीं बढ़ी ,
माँ अम्बे की गुफा का तब दर्शन पाया ।
बात 1970 की है मेरे प्यारों,
मा मंगला ने अम्बा माँ की भक्ति पाया ।।

गुफा के आस-पास तब भयानक जंगल था,
उसमे तब जंगली जानवर रहा करते ।
गांवो के ग्वाल -बाल अपनी बहुत सी गायों को,
उन जंगलों मे थे वे चराया करते ।।

एक दिन भैय्या गायकी नाम के ग्वाले को,
अचानक जोर से थी तब बड़ी प्यास लगी ।
पानी की खोज में भटकते हुए उस ग्वाले को,
माँ अम्बा की पावन गुफा दिखाई दी ।।

वहीँ पे मंगला ने पानी पिलाया प्यासे को,
और उस गुफा के बारे में  था बतलाया ।
उसकी बातों को सुनके ग्राम सावँगी व हिवरा के,
भक्तों का झुण्ड था सबसे पहले आया ।।

इन्हीं भक्तों मे केशो पटेल थे सच्चे,
जो कि घोड़ी-घोघरा के रहने वाले थे ।
माँ अम्बा की पावन गुफा को तब,
मा मंगला के साथ मिलके सबको बतलाये थे ।।

एक रात केशो को लेकर मा राधा ने,
उस गुप्त गुफा की यात्रा को आरम्भ किया ।
जैसे-जैसे वे आगे थे बढ़ते जाते ,
उनको कुछ दूर पे एक सुंदर सरोवर है दिखा ।।

उस पावन सरोवर के किनारे तब,
उन्हें शिव-पार्वती-गणेश का प्रतिमा है मिला ।
कुछ दूर आगे जाकर उनको तब,
माँ काली की प्रतिमा का दर्शन भी मिला ।।

उन्हीं के पास में सुंदर फलों के बगीचे थे ,
जहाँ पे आठ साधुओं को देखे वे तपस्या में ।
वहीँ शिव-पार्वती की प्रतिमा के पास ही ,
माँ अम्बा देवी के तब दर्शन है हुए ।।

उस गुप्त गुफा का मार्ग बहुत छोटा है,
जहां पे जंगली जानवरों का बसेरा था ।
वहीँ पांडवों के अज्ञातवास के दिन में,
यहीँ पे उन सबका यहां पे डेरा था ।।

एक बार शिव जी भस्मासुर से बचने के लिए ,
इसी गुफा में तब उन्होंने विश्राम किया ।
यहां पे कई ऐसी गुफाऐं हैं,
जो कि जाके पंचवटी महादेव में मिला ।।

कुछ दिन बाद मा राधा ने अपने गुरु को बुलवाकर,
और उन्हें सारी कहानी है बतलाई ।
तत्पश्चात गुरु सूरदास स्वामी ने,
अम्बा देवी के बारे में भविष्यवाणी की ।।

यहां भक्तों की भीड़ श्रद्धा के साथ आ करके,
माँ अम्बा की सब जय-जय कार बुलाएंगे ।
अमावश्या ,पूर्णिमा को माँ के दरबार में तब,
अधिक से अधिक भक्त माँ को तब मनाएंगे ।।

मा राधा ने 14 साल तक अन्न-जल न लिया ,
वे फल-फूल-पत्तियां ही बस खाती थीं ।
मा राधा को उनके गुरु मंगला कहते ,
पर भक्तों के बीच माँ राधा ही जानी जाती ।।

35 भक्तों के साथ सन् 1978 में,
मा राधा ने भारत में तीर्थ यात्राऐं की ।
गंगा सागर,अयोध्या,रामेश्वरम,
मथुरा,हरिद्वार ,प्रयागऔर काशी ।।

ऐसी माँ अम्बा की भक्त मा राधा थी,
जिसने माँ अम्बा की भक्ति पाया ।
माँ अम्बा के भक्त रविन्द्र मांकर से कहानी सुनकर,
कवि मोहन ने इस रचना को है रच डाला ।।

मेरी विनती है आप सबसे माँ के भक्तों,
कभी किसी के दिल को दुखाना तुम नहीँ ।
जिंदगी चार दिन की है बस अपना समझो,
किसी भी चीज का घमण्ड दिल में लाना तुम नही ।।

आओ हम अम्बा देवी माँ का,सुमिरन कर लें ।
अदि शक्ति शेरांवाली का तो हम,भजन कर लें ।।
माँ की प्यारी भक्त राधा का,
उनके चरणों मे हम नमन कर लें ।।
आओ हम अम्बा देवी माँ का......

मोहन श्रीवास्तव (कवि)

19-03-2015, Thursday, 04:30A.M,
Mahaveer Nagar ,Raipur(C.G)
(928).

Sunday, 22 March 2015

किसान

भर पेट के राशन जो हम है खाते,
फिर पेट पे हाथ फिराते है ।
कभी सोचा है क्या हमने,
ये कैसे उगाये जाते है ॥

चावल-दाल और तिलहन,
सब्जी,फल या दूध हो ।
वो खेती के फसल सभी,
या गन्ने का जूस ही हो ॥

इन सबको उगाने वाले ये,
जो मेहनती किसान है ।
धरती को सीचते अपने पसीने से,
इसीलिये ये महान है ॥

उसर,बँजर,उबड,खाबड,
ये धरती को खेत बनाते ।
बहुत बडी मेहनत से,
ये उसमें फसल उगाते ॥

चाहे जाड़े की ठडंक हो,
या जेठ की तपती धूप बहुत ।
चाहे बारिस का पानी हो,
पर काम ये करते परिवार सहित ॥

इतना मेहनत करके भी,
इन्हे फसल का उचित ईनाम नही मिलता ।
इस चका चौध दुनिया में देखों,
उतना किसानो को सम्मान नही मिलता
इस चका चौध दुनिया में देखों,
उतना किसानो को सम्मान नही मिलता ॥

चित्र  ; गूगल से साभार लिया गया ।


मोहन श्रीवास्तव  (कवि)
19-01-2014,Sunday,04:30pm (835)
Pune,M.H.
www.kavyapushpanjali.blogspot.in







Friday, 20 March 2015

धन्यवाद

मेरे  प्रिय मित्रगण ,

सादर सप्रेम अभिनंदन  व नमस्ते 

आज आप सब  जो मुझे मेरे जन्म दिन पर अपना अनमोल आशिर्वाद व शुभ कामनाएं  दे रहे हैं ,इसके लिए मै आप सभी मित्रों  का दिल से आभार प्रकट करता हूं  और साथ में इस पावन नवरात्रि  की बेला  में माता रानी  से प्रार्थना करता हूं  की वे आप सब के जीवन में सुख ,शांति  व  सौभाग्य प्रदान करें  । 

मोहन श्रीवास्तव (कवि )
09009791406 

धन्यवाद 

Friday, 27 February 2015

कैंसर रोग भयानक है


रोग तो बहुत है दुनिया में ,
पर कैंसर रोग तो भयानक है ।
तत्काल उपचार यदि नहीं हुआ  ,
तो मौत की निश्चित आहट है ।।


सर्दी खाँसी की तरह फैल रहा यह रोग,
जो प्राण पे संकट बन कर आता ।
इसकी सही दवा नहीं होने से ,
रोगी मौत के मुंह में समा जाता ।।


लगभग 280 तरह के ,
कैंसर का प्रकार है हुआ करता ।
तेजी से फैलते  हैं इसके किटाणु ,
और कभी देरी से भी पता चलता ।।


कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी से ही जादा ,
इसका उपचार किया जाता ।
यदि सफल रहा इसका प्रयोग ,
तब रोगी का आयु है बढ़ जाता ।।


कीमोथेरेपी के प्रयोग से ,
रोगी के बाल हैं झड़ जाते ।


शरीर के जो भी अच्छे तत्व हैं ,
इसके दुष्प्रभाव से नहीं है बच पाते ।।


खास बात इसका है मित्रों ,
कि यह छुआ छूत का रोग नहीं ।
रोगी से कीजिए भरपूर प्यार ,
और ईश्वर पे हो बिश्वाश सही ।।


इस रोग से बचना है तो ,
धूम्रपान - तम्बाकू का निषेध करें ।
हरी साग-सब्जी व फलों का ,
बहुतायत में प्रयोग करें ।।


योग्य व अनुभवी डाक्टरों का मिलना ,
इस रोग के लिये बहुत जरुरी है ।
नहीं तो पैसे भी बहाना व जान गवाना ,
ये हम सब की बस  मजबूरी है ।।


कैंसर के महंगे व लंबे ईलाज में ,
पैसे भी खर्च बहुत होते ।
इतने पर भी सगे -संबंधी , किसी अनहोनी से ,
सोच -सोच के हैं रोते ।।
इतने पर भी सगे -संबंधी , किसी अनहोनी से ,
सोच -सोच के हैं रोते ............


मोहन श्रीवास्तव (कवि)
10-02-2015, Tuesday,05:00AM,
Mahaveer Nagar ,Raipur (C.G)
(919)

Thursday, 29 January 2015

बस याद तुम्हारी ही है हमें


जहां भी देखूँ तुम ही तुम हो,
आती जाती इन श्वाशों में । 
तुम हर पल याद आती हमें ,
तुम अपने सुनहरे वादों में ॥ 

पायल की झनक जब कभी सुनता हूँ ,
लगता है तुम  आ रही हो ।
चूड़ी की खनक जब भी  सुनता ,
मानो तुम मुझे बुला रही हो ॥ 

जब कहीं बोल सुनता हूँ ,तुम जैसा,
मेरे धड़कन हैं बढ़ जाते । 
तश्वीर तुम्हारा जब मैं देखूँ ,
नयनों में नीर हैं  आते ॥ 

ये दोनों अनमोल रत्न ,
मेरे लिए तुम्हारी दो आँखे हैं । 
दोनों ही तुम्हारी तरह हैं ये ,
और इनके मजबूत ईरादे हैं ॥ 

न आश रहा ,न चाह रहा ,
ना ही कोई तो किनारा है । 
बस यादें तुम्हारी ही हैं हमें ,
जो देती हमें सहारा हैं ॥ 
बस यादें तुम्हारी ही हैं हमें ,
जो देती हमें सहारा हैं.. . . 

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
 (912)
7AM,Tuesday,Mahaveer Nagar,
Raipur (C.G) (912)
Mob.9009791406  

Tuesday, 20 January 2015

शोक संदेश ( आखिर कैन्सर से एक और जिन्दगी हार गई )

प्रिय मित्रों ,
आखिर कैन्सर से एक और जिन्दगी हार गई
मुझे अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है की मेरी धर्मपत्नी श्रीमती विभा श्रीवास्तवा का कैन्सर के कारण मात्र 2 माह 12 दिन की बिमारी में दिनांक 12-01-2015 को स्वर्गवाश हो गया। वे अपने पिछे एक पुत्र सौरभ (B.E Civil अंतिम वर्ष )व एक पुत्री समीक्षा( B.E , EEE प्रथम वर्ष) छोड़ गई हैं । 

''लिए थे फेरे सात थे हमने ,और किए थे कस्मे वादे।साथ जिएंगे ,साथ मरेंगे ,यही थे अपने ईरादे ॥ 
पर वो चली गई इस दुनिया से ,हम रह गए अकेले । 
बस यादें उनकी शेष हैं अब,जो लगते बड़े अलबेले ॥ 
बस यादें उनकी शेष हैं अब,जो लगते बड़े अलबेले ॥ 

मित्रों, मेरी अब तक की लिखी 900 रचनाएँ इनके लिए ही समर्पित हैं । 

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
रायपुर (छ. गढ़) 
mob-9009791406