Sunday, 9 June 2013

भोले बारात लेकर चले हैं


होके सवार नन्दी पे भोले,
व्याह गौरा संग रचाने चले हैं
उनके मुखड़े की अनुपम है शोभा,
भोले बारात लेकर चले हैं
होके सवार नन्दी पे भोले....

तन भभुती रमाये हुये वो,
डम - डम डमरू बजा वो रहे हैं
कर मे त्रिशूल बाबा के सोहे,
भोले देखो तो शरमा रहे हैं
होके सवार नन्दी पे भोले...

भोले बाबा के देखो बराती,
कोई किससे भी कम तो नही है
भूत - प्रेत - जोगी और जोगिन,
इनके रूप रंग कई हैं
होके सवार नन्दी पे....

कोई मोटे ,कोई तो हैं पतले,
कोई पैरों वाले हैं देखो
किसी-किसी के तो हाथ नही हैं,
कोई बहुत हाथ वाले है देखो
होके सवार नन्दी पे ........

किसी-किसी के तो कान नही हैं,
कोई बहुत कान वाले हैं भाई
किसी-किसी के तो नाक नही हैं,
पर बहुत नाक वाले हैं भाई
होके सवार नन्दी पे........

सभी नाच और कूद रहे हैं,
कोई आवाज़ डर के निकालें
उनकी गिनती तो करना है मुश्किल,
वे तो सबसे अलग निराले
होके सवार नन्दी पे......

कालों के भी महाकाल भोले,
अपनी लीला दिखा तो रहे हैं
सबको मोहने वाली है सुरत,
वे तो गिरिज़ा को रिझा जो रहे हैं

होके सवार नन्दी पे भोले,
व्याह गौरा संग रचाने चले हैं
उनके मुखड़े की अनुपम है शोभा,
भोले बारात लेकर चले हैं
होके सवार नन्दी पे भोले....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjalai.blogspot.com
08-06-2013,saturday, 7 pm.
pune.maharashtra


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