Tuesday, 11 September 2018

"श्री गणेश वंदना "

देवताओं में प्रथम ,सुमिर रहे हैं हम 
श्री गणेश आपका तो गुणगान करते | 
आओ आओ गजानन ,आपका मूसवाहन 
शिव सुत आपका हम आह्वान करते || 
विघ्न बाधा दूर करो ,कारज  को सिद्ध करो 
मंगलमूर्ति आपका सन्मान करते | 
बस आस आप पर ,निज दास जानकर 
हिरदे में आपको विराजमान करते || 

 कवि मोहन श्रीवास्तव



Thursday, 30 August 2018

"चारों तरफ तामसी, प्रबृति का बोलबाला "

चारों तरफ तामसी, प्रबृति का बोलबाला 
असुर समान इंसान आज हो रहे | 
जीवहत्या नशाखोरी , पापकर्म , बेईमानी 
बुरे कर्मों का बीज सब जगह बो रहे || 
नारियों पे अत्याचार, रोज होते बलात्कार 
बेटियों को गर्भ में ही आज लोग खो रहे | 
पाप कर्म देख देख, और कुरूप वेष 
सीधे सादे इंसानों के दिल तो आज रो रहे || 

कवि मोहन श्रीवास्तव 

Friday, 24 August 2018

"कालिका कराल काल, गले नर मुण्डमाल "

कालिका कराल काल, गले नर मुण्डमाल 
करती रुधिर पान और अट्हास है | 
जिव्हा ज्वलिनी  ज्वाल, नयना हैं लाल लाल 
शत्रुओं का प्रतिपल करती विनाश है || 
भक्तों की करती जय, पापियों की करे क्षय 
रक्तबीज जैसों से बुझाती निज प्यास है | 
भक्तों के लिए है ढाल, वैरियों के लिए काल 
महाकाली हमको तो तुमपे ही आस है || 

कवि मोहन श्रीवास्तव

Friday, 17 August 2018

"हे अजातशत्रु अटल बिहारी जी "

"युग पुरुष अटल जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि" 

 हे अजातशत्रु अटल बिहारी जी 
शत शत बार नमन तुमको  |
भारत माता के सच्चे सपूत 
बारम्बार नमन तुमको  ||

अपने शासन काल के दिनों में 
तुमने जो करके दिखलाया था |
आजादी से अब तक ना कोई 
ऐसा तो कर पाया था ||

सत्य अहिंसा भाई चारे की 
नीति पे चलने वाले थे |
कटुता -शत्रुता भुला करके 
सबको साथ में लेके चलने वाले थे ||

हे युगपुरुष तुम चले गए 
छोड़ के इस भवसागर को |
अब प्रेम अमृत से कौन भरेगा 
भारत माता के गागर को ||

आशीष तुम्हारा हम सबको 
सदा सदा ही मिलता रहे |
भारत माता के  अनमोल पुष्प 
तू जनमानस में खिला रहे ||
भारत माता का अनमोल पुष्प 
तू जनमानस में खिला रहे ||

कवि मोहन श्रीवास्तव

  

Tuesday, 14 August 2018

"कालों के भी महाकाल, भारत माता के लाल "




कालों के भी महाकाल, भारत माता के लाल 
शत्रुओं के सीस काट काट आगे बढिये | 
थम जाये वैरी चाल, कर दो बेहाल हाल 
रिपुओं  के शव पाट पाट आगे बढिये || 
चारों ओर उड़े धूल, अरि जाएं राहभूल 
द्रोहियों को डांट डांट कर आगे बढिये | 
ऐसा करो प्रतिघात, जल कर होवे खाक
वैरियों को मार मार लात आगे बढिये || 
 मोहन  श्रीवास्तव 

Monday, 13 August 2018

"वही होकर बड़े माँ - बाप को जख्मी किया करते"

उम्मीदों के भरोसे ही यहाँ पे सब जिया करते ,
सभी अपमान को सहकर जहर को भी पिया करते | 
बहुत अरमान से सब पालते हैं  अपने बच्चों को ,
वही होकर बड़े माँ - बाप को जख्मी किया करते || 

मोहन श्रीवास्तव ( कवि )