Tuesday, 9 October 2018

"महादेव शंभो पुकारा करेंगे "

भुजंग प्रयात छंद ( ISS  ISS  ISS ISS )


महादेव शंभो पुकारा करेंगे |
तुम्हारे बिना ना गुजारा करेंगे ||
महादेव शंभो पुकारा करेंगे.......

हरी ध्यान बाबा तुम्ही हो लगाते |
सभी के दुखों को सदा हो मिटाते ||
जटा शीश  गंगा तुम्ही हो समाते  |
दुखी लोग जो हैं गले से लगाते ||
बिहाने बिहाने उचारा करेंगे |
महादेव शंभो पुकारा करेंगे.......

भवानी करे ध्यान बाबा तुम्हारी |
इसी हेतु वो है तुम्हारी पियारी ||
अर्ध चंद सोहे गले सांप माला |
गणेशा व् कार्तिक दोनों उजाला ||
सुबो शाम भोले निहारा करेंगे |
 महादेव शंभो पुकारा करेंगे.......

जटाजूट माथे सुहाना लगे है |
भभूती रमाये दिवाना लगे है ||
मदारी ,अनाड़ी ,कहे हैं पुरारी |
सदा लाज राखो तुम्ही त्रीपुरारी ||
सभी को आधारे उबारा करेंगे ||

महादेव शंभो पुकारा करेंगे |
तुम्हारे बिना ना गुजारा करेंगे ||
महादेव शंभो पुकारा करेंगे.......

कवि मोहन श्रीवास्तव 
 http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2018/10/blog-post_9.html


रचना क्रमांक ;-( 1112 )
04/10/2018



Friday, 5 October 2018

"जब याद करें तब आँख भरे "

तोटक छंद
 (   I I S    I I S   I I S   I I S  )

जबसे तुमको हम ध्याय रहे ,
तब से जग मोह समान लगे |
हर जीव बिना तुम होत दुखी ,
सब ओर जहान मसान लगे || 

अब नाथ दया कर दो हमपे ,
सब छोड़ तुम्हे नित ध्यान करें |
बस आस तुम्ही पर हो गहरा ,
जब याद करें तब आंख भरें ||

धन दौलत की अब चाह नहीं ,
कहता जग क्या परवाह नही |
जन मानस जान सके न तुम्हें ,
तुम सागर हो तव थाह नही ||

हमसे यदि हो गलती फिर भी ,
तब नाथ हमें तुम माफ़ करो | 
मन में अभिमान जगे जब भी ,
अपराध क्षमा दिल साफ करो || 

हम दीन दुखी असहाय सुनो ,
तुम आदि अनादि अनंत पिया |
जग पे उपकार तुम्ही करते ,
तुमसे बढ़के न कहीं रसिया ||


जबसे तुमको हम ध्याय रहे ,
तब से जग मोह समान लगे |
हर जीव बिना तुम होत दुखी ,
सब ओर जहान मसान लगे || 

कवि मोहन श्रीवास्तव 
http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2018/10/blog-post.html





Friday, 28 September 2018

मै व् मेरी श्रीमती कवयित्री शोभा मोहन श्रीवास्तव  जी काव्य पाठ  करते हुए 





Wednesday, 26 September 2018

'चरखे का बस गुणगान मत करिए '

देश को आजादी मिली , सबकी थी बांछे खिली 
चरखे का बस  गुणगान मत करिए |
बड़े बड़े वीरवर , देश पथ निछावर 
बलिदानियों का हीनमान मत करिए ||
 बाहरी लुटेरे थे जो , लूटने को घेरे थे जो 
उनका यहाँ पे सनमान मत  करिए |
सच्चा इतिहास अब , जानें  देशवासी सब 
झूठे इतिहास का बखान मत करिए ||

कवि मोहन श्रीवास्तव 


Tuesday, 11 September 2018

"श्री गणेश वंदना "

देवताओं में प्रथम ,सुमिर रहे हैं हम 
श्री गणेश आपका तो गुणगान करते | 
आओ आओ गजानन ,आपका मूसवाहन 
शिव सुत आपका हम आह्वान करते || 
विघ्न बाधा दूर करो ,कारज  को सिद्ध करो 
मंगलमूर्ति आपका सन्मान करते | 
बस आस आप पर ,निज दास जानकर 
हिरदे में आपको विराजमान करते || 

 कवि मोहन श्रीवास्तव



Thursday, 30 August 2018

"चारों तरफ तामसी, प्रबृति का बोलबाला "

चारों तरफ तामसी, प्रबृति का बोलबाला 
असुर समान इंसान आज हो रहे | 
जीवहत्या नशाखोरी , पापकर्म , बेईमानी 
बुरे कर्मों का बीज सब जगह बो रहे || 
नारियों पे अत्याचार, रोज होते बलात्कार 
बेटियों को गर्भ में ही आज लोग खो रहे | 
पाप कर्म देख देख, और कुरूप वेष 
सीधे सादे इंसानों के दिल तो आज रो रहे || 

कवि मोहन श्रीवास्तव 

Friday, 24 August 2018

"कालिका कराल काल, गले नर मुण्डमाल "

कालिका कराल काल, गले नर मुण्डमाल 
करती रुधिर पान और अट्हास है | 
जिव्हा ज्वलिनी  ज्वाल, नयना हैं लाल लाल 
शत्रुओं का प्रतिपल करती विनाश है || 
भक्तों की करती जय, पापियों की करे क्षय 
रक्तबीज जैसों से बुझाती निज प्यास है | 
भक्तों के लिए है ढाल, वैरियों के लिए काल 
महाकाली हमको तो तुमपे ही आस है || 

कवि मोहन श्रीवास्तव