Sunday, 11 August 2013

भारत माँ चण्डी बन घूम रही

कर रहा हिमालय है ताण्डव,
भारत माँ चण्डी बन घूम रही ।
अपने बेटों के प्राण का बदला,
कब लोगे ? हमसे पूछ रही ॥

हिंद महा सागर  की लहरें,
रह-रह कर है खौल रही ।
गंगा,यमुना और कावेरी,
हर-हर महादेव है बोल रही ॥

मुंह खोल रही भारत की धरा,
दुश्मनों को निगल जाने को ।
भारत के सिंह दहाड़ रहे,
युद्ध का बिगुल बजाने को ॥

अट्टहास कर रहे ये बादल,
शत्रुओं की धरती डुबाने को ।
ज्वालामुखी बन गये हैं पर्वत,
पापियों की लंका जलाने को ॥

माँ काली बन गई हैं स्त्रियां,
दुश्मनों का रुधिर पी जाने को ।
जय-जय घोष कर रहे, बच्चों की टोलियां,
विजय पताका लहराने को ॥
जय-जय घोष कर रहे, बच्चों की टोलियां,
विजय पताका लहराने को.........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.bolgspot.com
10-08-2013,sunday,5.30pm,(716)
pune,maharashtra.




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