Thursday, 17 October 2013

बेटियां

होती हमारी आन है,देखो ये बेटियां
कितनों की तो ये प्राण ,होती है बेटियां

घर को सदा खुशहाल, करती हैं बेटियां
वक्त के अनुसार ही, ढलती है बेटियां

बेटों से कभी कम नही, होती हैं बेटियां
कितने कुलों की लाज को ,ढोती हैं बेटियां

पापा का देखो ख्याल, ये करती हैं बेटियां
मां को बहुत ही प्यार, ये करती हैं बेटियां

भाईयों की लाज ये, होती हैं बेटियां
पति के दिलों मे राज भी, करती हैं बेटियां

शक्ति की अवतार भी, होती है बेटिय़ां
आखों से भी प्रहार ये, करती हैं बेटियां

कभी दहेज की आग मे, जलती है बेटियां
कभी ज़ालिमों के वार से, मरती है बेटियां

कभी पापियों के ज़ुल्म को, सहती है बेटियां
कभी पति के बिरह की आग मे, जलती है बेटियां

होती किसी भी देश की, गौरव ये बेटिय़ां।
अपने ये देखो आंगन की, कलरव है बेटियां

ममता की भंडार ये, होती है बेटियां
कितनों का उद्धार ये, करती हैं बेटियां

होती हमारी आन है,देखो ये बेटियां
कितनों की तो ये प्राण ,होती है बेटियां

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१३-०५-२०१३,
सोमवार,शाम बजे, पुणे, महाराष्ट्र




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