Friday, 4 October 2013

देवी गीत (अंगना मे आई हमरी मइया)


अंगना मे आई हमरी मइया,
अंजोरिया सी छाय गई दिल मे.....

अपनी मइया की तो सिंह की सवारी है
लाल चोली है और अष्टभुजा धारी है
सोने का मुकुट और खड्ग खप्पर धारी है
हंसती हुई... आई हमरी मइया,
अंजोरिया सी छाय गई दिल मे
अंगना मे आई...........

मइया तो हमरी है भाव की भुखी
कोई खिलाये चाहे रुखी-सुखी
शरण मे आते हैं जो ना होते कभी दुःखी
उंचे पर्वतों से आई हमरी मइया,
अंजोरिया सी छाय गई दिल मे
अंगना मे आई...........

आओ सब जन मिल के आरती उतारो
अंसुअन से मइया के चरण पखारो
दिल तो मइया की मूरत बसा लो।
अपनी दया .. ,बरसाय रही मइया...
अंजोरिया सी छाय गई दिल मे

अंगना मे आई हमरी मइया,
अंजोरिया सी छाय गई दिल मे.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
07-09-1999,tuesday,4pm,
chandrapur,maharashtra.



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