Saturday, 12 October 2013

देवी गीत (कैसे करूं माँ विदाई मै तेरी)

कैसे करूं माँ, विदाई मै तेरी,
जाने का दुःख मोसे, सहा नही जाये ।
जैसे बिदा हो कोई, बिटिया की डोली,
वैसे ही दुःख मोसे, कहा नही जाये ॥
कैसे करूं मा.......

फुटि-फुटि रोएं सब, घर के लोगवां,
अंखियन के आंसू, सबसे रोका नही जाये ।
छुपि-छुपि रोएं सब, घर के लोगवां,
तोहरी बिदाई का गम, देखा नही जाये ॥
कैसे करूं मां.........

नौ दिन करते थे ,सब तेरी सेवा,
आज हमे छोड़ के ,चली जा रही हो ।
तुझको खिलाते थे सब, रूखा-सुखा मेवा,
आज मुंह मोड़ कर, चली जा रही हो ॥
कैसे करूं मा...........

थर-थर कांप रहे, हाथ मेरे  मइया,
तुझे तो जल मे, छोड़ा नही जाये ।
धक-धक धड़के है, दिल मेरा मइया,
तुझे मां अकेली यहां, छोड़ा नही जाये ॥

कैसे करूं मां ,बिदाई मै तेरी,
जाने का दुःख मोसे, सहा नही जाये ।
जैसे बिदा हो कोई, बिटिया की डोली,
वैसे ही दुःख मोसे, कहा नही जाये ॥
कैसे करूं मां..........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com

१६-४-२०१३,मंगलवार,शाम-४.३० बजे,

पुणे,महा. 

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