Tuesday, 8 October 2013

देवी गीत (हे माँ तुझे क्या खिलाऊं मैं)

हे माँ तुझे क्या खिलाऊं मै,
कुछ भी तो पास नही मेरे ।
हम दीन-हीन-गरीब हैं,
फ़िर भी तो दास हैं हम तेरे ॥
हे माँ तुझे क्या.......

रखने को है कलश नही,
ना ही धान्य ही मेरे पास है ।
नव ग्रह कहां से लाऊं मै,
मेरा दिल बहुत ही उदास है ॥
हे माँ तुझे क्या.......

नही है तेरे लिये चूंदरी,
ना ही कोई श्रृंगार है ।
ना ही धूप-दीप व नारियल,
ना ही तो फूलों का हार है ॥
हे माँ तुझे क्या....

कैसे जलाऊं मै दीप मां,
ना तेल -घी मेरे पास है ।
कैसे लगाऊं मै भोग मां,
कुछ भी तो नही मेरे पास है ॥
हे माँ तुझे क्या......

कैसे हम दें मां दक्षिणा,
ना ही द्रव्य ही मेरे पास है ।
श्रद्धा के बस हैं आंसू मां,
जिन्हें चरणों की तेरे तलाश है ॥

हे माँ तुझे क्या खिलाऊं मैं,
कुछ भी तो पास नही मेरे ।
हम दीन-हीन-गरीब हैं,
फिर भी तो दास हैं हम तेरे ॥
हे माँ तुझे क्या .........

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
१६--२०१३,मंगलवार,११ बजे,

पुणे,महा
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