Thursday, 16 January 2014

क्रांतिवीर मंगल पाण्डेय

स्वतन्त्रता संग्राम की लड़ाई में,
जब-जब उन वीरों को याद करेंगे हम
तब-तब क्रांति वीर मंगल पाण्डेय का,
गर्व से बात करेंगे हम

पावन धरती बलिया मे,
मंगल पाण्डेय जी का जन्म हुआ
अपनी अमर गाथावों से,
जो आज है देखो अमर हुआ

सिंह की दहाड़,मदमस्त चाल,
वे आजादी के मतवाले थे
सीने में दहकती थी आग,आखों मे मशाल,
वे मातृ भूमि के परवाने थे

चरबी युक्त कारतूस को लेकर,
वे आजादी का बिगुल बजाये थे
अंग्रेजी सिपह-सलारों को,
वे जगह पर ही मार गिराये थे

सन सत्तावन की क्रांति में,
अंग्रजों को,उनकी नानी याद दिलाये थे
मातृ भूमि की बलिबेदी पर,
अपने प्राण गवांये थे

कोटी-कोटि है नमन हमारा,
ऐसे बहादुर नायक को
जो हसते-हसते फांसी पे चढ़ा,
ऐसे भारत माँ के लायक को
जो हसते-हसते फांसी पे चढ़ा,
ऐसे भारत माँ के लायक को.....

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
12-01-2014,Sunday,10:00PM,(827),
Pune,M.H




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