Tuesday, 17 July 2018

"तुमको निहारूं श्याम"

तुमको निहारूं श्याम , दिन - रात सुबो शाम ,
जिंदगी तो तेरी ही कहानी अब लगती | 
मूरतिया प्यारी तेरी , देखूं बस घड़ी घड़ी ,
तेरी हर बात ही , सुहानी अब लगती ||
गाल है गुलाबी तेरे , नैन हैं शराबी तेरे ,
मस्त रहूं मै  तो , मस्तानी अब लगती  | 
दरशन की है आस   , बुझती  नहीं है प्यास ,
मीरा जैसी मै  भी तो  दिवानी अब लगती ||१ ||

कानो के कुंडल तेरे , कटि करधनी घेरे ,
सुंदर श्रृंगार कर जग को रिझा रहे ।
बांसुरी की छेड़ तान ,नेह भरी मुस्कान ,
नारी ब्रजवासिनी को बावरी बना रहे । 
ग्वाल बाल जन संग ,गोपी संग रास रंग ,
मेरे हरि  लीला कर , सुख को लुटा रहे ।
सब के जीवन धन , रहे कर मनहरन ,
किसी को रूठा रहे तो किसी को मना रहे ।।२।

 
 



मोहन श्रीवास्तव ( कवि )



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