Friday, 5 October 2018

"जब याद करें तब आँख भरे "

तोटक छंद
 (   I I S    I I S   I I S   I I S  )

जबसे तुमको हम ध्याय रहे ,
तब से जग मोह समान लगे |
हर जीव बिना तुम होत दुखी ,
सब ओर जहान मसान लगे || 

अब नाथ दया कर दो हमपे ,
सब छोड़ तुम्हे नित ध्यान करें |
बस आस तुम्ही पर हो गहरा ,
जब याद करें तब आंख भरें ||

धन दौलत की अब चाह नहीं ,
कहता जग क्या परवाह नही |
जन मानस जान सके न तुम्हें ,
तुम सागर हो तव थाह नही ||

हमसे यदि हो गलती फिर भी ,
तब नाथ हमें तुम माफ़ करो | 
मन में अभिमान जगे जब भी ,
अपराध क्षमा दिल साफ करो || 

हम दीन दुखी असहाय सुनो ,
तुम आदि अनादि अनंत पिया |
जग पे उपकार तुम्ही करते ,
तुमसे बढ़के न कहीं रसिया ||


जबसे तुमको हम ध्याय रहे ,
तब से जग मोह समान लगे |
हर जीव बिना तुम होत दुखी ,
सब ओर जहान मसान लगे || 

कवि मोहन श्रीवास्तव 
http://kavyapushpanjali.blogspot.com/2018/10/blog-post.html





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