Saturday, 18 July 2026

कजरी “चलब शेमराध नगरिया ना”

 (कजरी)

“चलब शेमराध नगरिया ना”


हरे रामा रहइं जहाँ शिवदानी

चलब शेमराध नगरिया ना...

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना...

हरे रामा रहॅइ….


हर हर बम बम बोलत जइबइ

नंदी बबा के माथ नवउबइ

घण्टा बाजइ दुअरिया ना... 2

मंदिर पर त्रिशूल विराजइ

कलशा ध्वजा शिखरिया ना..2 (1)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना...2

हरे रामा रहॅइ….


पुजबइ पहिले गउरी लाला

फिरि आउब जहाँ काल के काला

जेकरे सीस अजोरिया ना... 2

मूरत सुघर लगइ मनभावन

नगवा करइ छतरिया ना.. 2(2)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….


बेल पान गंगाजल नरियल

धूप दीप नैवेद्य सुमन फल

संग गुलाल अबिरिया ना... 2

अउर चढाइब पूड़ी हलुआ

पूजब शिव की गुजरिया ना..2(3)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….


पास पास मे औरउ मंदिर

हनुमत लखन रामसिय सुंदर

दुर्गा शेर सवरिया ना... 2

राधा कृष्ण लगइं अति प्यारे

जेकर हाथ बसुरिया ना....(4)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….


दूर दूर से दरश को आवहिं

नर नारी सब खूब मनावहिं

शिव शेमराध उदरिया ना...2

पूजा विधि समेत करवावहिं

गुरु गोसाईं दरबरिया ना... 2 (5)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….


पावन कथा सुनब संतन से

फेरि लउटबइ हर्षित मन से

करि परणाम दुअरिया ना... 2

मूरत परम मनोहर हिय में

रखबइ शिव भण्डरिया ना...2(6)

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….

हरे रामा रहॅइ जहाँ शिवदानी

चलब शेमराध नगरिया ना...

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना...

करि स्नान गँग महरानी

देखबइ सुघर लहरिया ना

हरे रामा रहॅइ….


कवि मोहन श्रीवास्तव

18-07-2026, शनिवार

महुदा, झीट, अमलेश्वर, दुर्ग

छत्तीसगढ़ 


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