Friday, 30 September 2011

अब एड्स ने पांव पसारा है

संभल जावो ऐ आशिक आवारों ,
इस बढ़ते हुए एड्स की बिमारी से !
खुद को इससे अपने को बचावो,
इस मौत की महामारी से !!

बिजली की गति से यह बढ़ रही बिमारी,
जिसमें प्राण तो जाना निश्चित है !
यह छुआ -छूत का रोग भी है,
इससे बच पाना मुश्किल है !!

जीवन से प्यार है तुमको जरा,
और औरों का जीवन प्यारा है !
तो पर स्त्री गमन से दूर रहो,
अब एड्स ने पांव पसारा है !!

एड्स की बिमारी यदि तुम्हे लगी,
तो समाज से बहिस्कृत किए जावोगे !
चारों तरफ़ से थू-थू-होगी,
और घुट -घुट कर मर जावोगे !!

इसलिए यदि इससे बचना है तो,
अपनी दुर्बासनावों पर काबू पाना होगा !
बे-शर्मी की मौत नही मिले,
इससे अपने को दूर रखना होगा !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक - २६/०३/२०००,
रविवार, दोपहर १२.३० बजे

चंद्रपुर (महाराष्ट्र)


 
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