Sunday, 2 October 2011

भ्रूण हत्या है महापाप

भ्रूण हत्या है, महापाप,
इससे बड़ा है, कोई पाप नही !
बेटा जन्मने की, लालच में
बेटियों पर करना, घात नही !!

तुम भी कभी, किसी कि बेटी थी,
जो आज बनी, एक माता हो !
भ्रूण हत्या को, करते-करते,
जो माता से बनी, कुमाता हो !!

यदि तुम्हारे, माता-पिता ने ,
तुम्हे जन्म से पहले, मार दिया होता !
तो तुम आज कहांसे बच पाती
जब तुम्हे जिंदा ही, हलाल किया होता !!

पिता बने हो, आज किसी के
तुम भी कभी किसी के, आंखों के तारे थे !
यदि तुम्हे भी जन्म से, पहले मार दिया जाता,
तो तुम आज कहां से, बच पाते थे !!

यदि नही चाहिए,, बेटा-बेटी,तो,
गर्भ निरोधक चीजों का, प्रयोग करो !
जिसमे हत्या का कलंक, लगने पाए,
ऐसे संसाधनों का, सदुपयोग करो !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
दिनांक-१६/१०/२०००,सोमवार ,
दोपहर - .२० बजे चंद्रपुर(महाराष्ट्र)





Post a Comment