Saturday, 10 March 2012

अनमोल रत्न

हिन्दुस्तान के बेटे- बेटियों ,
अब अपनी चिर-निद्रा दूर करो !
आलस -प्रमाद को दूर भगाकर,
अब अपनी तन्द्रा दूर करो !!

भारत माता के अनमोल रत्न,
तुम अब अपने को पहचानो !
बापू-सुभाष-बाबा साहेब तुम,
वैसे ही तुम हो जानो !!

तेजी से बदल रही दुनिया के,
साथ हमे भी चलना है !
कहीं हम पिछे न रह जाएं,
यह बात दिल मे हमे रखना है !!

जाति-पाति व ऊंच-नीच का,
मिथ्या भेद बदल डालो !
सामाजिक बुराइयों को,
 तुम जड़ से, इसे पलट डालो !!

आपसी भेद भुलाकर ही,
कई नेक काम हमे करने है !
गरीबी-बेकारी व शिक्षा के क्षेत्र मे,
नित नए खोज हमे करने है !!

निजी स्वार्थ को भुलाकर के हम,
भारत के हित की सोच करें !
दुनिया मे नाम हो जैसे इसका,
 हम इसके बिषय मे शोध करें !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
२५//१९९९,सुबह-:३०बजे,
चन्द्रपुर,महा.



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