Tuesday, 13 March 2012

खाली झोली भर दे मां

कर दे-कर दे,तू उपकार ,हमपे अम्बे मां !
भर दे -भर दे, तू खाली झोली ,अपनी अम्बे मां !!
कर दे-कर दे तू उपकार............

हम अति दीन -दुखी है मैया मेरी,दे दो हमे सहारा !
डूब रही है नइया अपनी, दे दो इसे किनारा !!
कर दे-कर दे तू उपकार.........

कितने दिनो से नयना मेरे, दर्शन को तेरे प्यासे !
दरश नही मिलता है क्युं मां,क्या हम इतने अभागे !!
कर दे-कर दे तू उपकार............

ऊंचे गुफ़ावों वाली मइया ,वो मा शेरा वाली !
लक्ष्मी,दुर्गा,पार्वती तू,सीता कृष्णा काली !!
कर दे- कर दे तू उपकार.............

तुझपे जो मा आशा रखते,निराश होने देती !
उन्हे मन चाहा वर देकर मा,आंचल मे ढक लेती !!

कर दे-कर दे तू उपकार,हमपे अम्बे मां !
भर दे-भर दे तू खाली झोली,अपनी अम्बे मां !!

मोहन श्रीवास्तव (कवि)
www.kavyapushpanjali.blogspot.com
२७//१९९९,रात्रि ११ बजे,

चन्द्रपुर महा.
Post a Comment